महोत्सव पंडाल में आयोजित अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, कवियों ने दी शानदार प्रस्तुतियां

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इटावा। महोत्सव पंडाल में गुरुवार रात अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर के प्रमुख कवियों ने अपनी शानदार कविताओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम के संचालक डॉ. शिवओम अंबर ने अपने अनोखे अंदाज में एक के बाद एक कवियों को मंच पर आमंत्रित किया, और कार्यक्रम का संचालन बेहतरीन तरीके से किया।

कार्यक्रम की शुरुआत प्रसिद्ध गायिका मनु वैशाली द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुई, जिसने वातावरण को आध्यात्मिक रूप से भी शुद्ध किया। इसके बाद, वरिष्ठ कवि पदमश्री डॉ. सुरेंद्र दुबे ने अपनी कविताओं के माध्यम से वर्तमान समाज की समस्याओं और राजनीतिक व्यवस्था पर गहरी बातें की। उन्होंने अपनी कविताओं से समाज में व्याप्त असमानता और भ्रष्टाचार पर तीखा प्रहार किया।

इसके बाद हास्य रस के धुरंधर कवि सुरेश अलबेला ने अपनी मजेदार कविताओं से उपस्थित श्रोताओं को लोटपोट कर दिया। उनका हास्य रस से भरपूर काव्यपाठ पंडाल में गूंजता रहा, और श्रोता उनहें लगातार ताली बजाकर सम्मानित करते रहे।

कवि कमलेश शर्मा ने अपनी कविता के माध्यम से यह संदेश दिया कि “जतन से संवारी कलम बोलती है, जहां लोग अन्याय पर मौन रहते हैं, वहां हमारी कलम बोलती है।” उनकी काव्य रचनाएं पंडाल में गूंजती रहीं, और उपस्थित श्रोताओं ने तालियों से उनका स्वागत किया।

कवि गजेंद्र प्रियांशु ने भी अपनी काव्य प्रस्तुति में एक नई छाप छोड़ी। उन्होंने कहा, “अब की फाल्गुन में जब शादियां आएंगी, तब घर में खुशियों की चाबियां आएंगी।” उनकी कविता ने श्रोताओं को बहुत प्रभावित किया और पंडाल में तालियों की गड़गड़ाहट सुनाई दी।

इसके बाद डॉ. विष्णु सक्सेना ने अपनी काव्य प्रस्तुति में यह कहा, “जैसे ही दिल चीमार सही हो, वो दवाएं दे दें, मैं सबपे प्यार लुटाऊं वो दुआएं दे दें।” उनकी कविता को श्रोताओं ने बहुत सराहा, और तालियों से उनका स्वागत किया। इसके बाद उन्होंने एक और भावपूर्ण कविता प्रस्तुत की, जिसमें उन्होंने प्रेम और समर्पण की भावना को व्यक्त किया।

हास्य कवि हेमंत पांडे ने अपनी हास्य प्रस्तुतियों से श्रोताओं को गुदगुदाया। उन्होंने अपनी कविता में कहा, “एक एक प्रेमिका को बांटकर ले गए, जो नहीं माना उसे डाट कर ले गए, जिस पेड़ से बाधा मोहब्बत का धागा, नगर निगम वाले उसे ही काट कर ले गए।”

इसके बाद मुमताज नसीम ने प्रेम गीतों से पंडाल में रंग भर दिया। उन्होंने अपनी प्रस्तुति में गाया, “आज मौका है जी भर के तुम देख लो, फिर देखने को जीवन भर तरस जाओगे।” उनकी आवाज और गीतों का जादू श्रोताओं पर छा गया।

इस कार्यक्रम में मंच पर हास्य कवि हेमंत पांडे, ओज व वीर रस के कवि विनीत चौहान, राम भदावर ने भी अपनी प्रस्तुति से श्रोताओं का दिल जीत लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पूर्व सांसद प्रो. डॉ. रामशंकर कठेरिया और पूर्व जिलाध्यक्ष भाजपा गोपाल मोहन शर्मा ने की।

कार्यक्रम के संयोजक प्रेम शंकर शर्मा ने सभी कवियों को सम्मानित किया और इस सफल आयोजन को संपन्न किया। इस कवि सम्मेलन में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और कवियों की प्रस्तुति का आनंद लिया।

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