नुमाइश से लेकर राहत कार्यों तक, इटावा के कर्मठ और जनप्रिय उपजिलाधिकारी : विक्रम सिंह राघव

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विक्रम सिंह राघव उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा के उन युवा अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपने ज्ञान, कार्यशैली और ईमानदारी से न केवल अपनी पहचान बनाई है बल्कि जिस भी ज़िले में तैनात रहे, वहाँ के लोगों के दिलों में सम्मान अर्जित किया। यूपीएससी 2021 में प्रदेश में 12वीं रैंक प्राप्त कर चयनित हुए विक्रम सिंह राघव का जीवन संघर्ष, अनुशासन और सेवा भावना का सजीव उदाहरण है।

उनका जन्म 30 मार्च 1994 को बुलंदशहर जनपद में हुआ। पिता ललित सिंह राघव एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं और माँ पंकज देवी गृहिणी हैं, जिन्होंने बचपन से ही विक्रम सिंह राघव में ईमानदारी, परिश्रम और सामाजिक जिम्मेदारी के संस्कार डाले। प्रारंभिक शिक्षा बुलंदशहर में ही हुई, और माध्यमिक शिक्षा छत्रपति शिवाजी सरस्वती विद्या मंदिर से पूरी की, जहाँ वे 10वीं और 12वीं दोनों परीक्षाओं में जनपद टॉपर रहे।

बचपन से ही विक्रम सिंह राघव एक मेधावी छात्र रहे। उनकी जिज्ञासु प्रवृत्ति और गहरी सोच ने उन्हें हर क्षेत्र में उत्कृष्टता दिलाई। उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए मोतीलाल नेहरू नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, इलाहाबाद में प्रवेश लिया और केमिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक. की उपाधि प्राप्त की। तकनीकी पृष्ठभूमि से आने के बावजूद, उनका मन सदैव समाज की सेवा करने और लोगों की समस्याओं का समाधान करने में रमा रहा।

स्नातक के बाद उन्होंने देश की अग्रणी कंपनी मारुति सुज़ुकी इंडिया लिमिटेड में असिस्टेंट मैनेजर के रूप में करियर की शुरुआत की। यह उनके जीवन का वह दौर था जब उन्होंने प्रबंधन, समय-नियोजन और नेतृत्व के व्यावहारिक पाठ सीखे। परंतु मन में कुछ बड़ा करने की चाह ने उन्हें सिविल सेवा की ओर अग्रसर किया।

सालों की कठिन मेहनत, अनुशासन और आत्मविश्वास के बाद उन्होंने यूपीएससी 2021 की परीक्षा में सफलता प्राप्त की। यह केवल एक व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा थी जो अपने सपनों को साकार करने की दिशा में संघर्षरत हैं।

उनकी पहली तैनाती बिजनौर जिले में उपजिलाधिकारी (एसडीएम) के रूप में हुई। यहाँ उन्होंने प्रशासनिक सेवा की बारीकियों को समझा और जनता से सीधे संवाद की संस्कृति विकसित की। वे समस्याओं के समाधान में त्वरित निर्णय और पारदर्शिता के पक्षधर रहे।

23 जून 2022 को विक्रम सिंह राघव को इटावा जिले की सदर तहसील में उपजिलाधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया। यहाँ उन्होंने प्रशासनिक, सामाजिक और सांस्कृतिक—तीनों ही स्तरों पर उल्लेखनीय कार्य किए। बाढ़ राहत हो या जन-सुनवाई, उन्होंने हर मोर्चे पर अपनी सक्रियता से जनता का भरोसा जीता।

इटावा की ऐतिहासिक नुमाइश के जनरल सेक्रेटरी होने के नाते उन्होंने प्रदर्शनी का स्वरूप पूरी तरह बदल दिया। सुरक्षा, स्वच्छता, भीड़ प्रबंधन और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के संयोजन ने इसे आधुनिक और आकर्षक बना दिया। उनके कार्यकाल में प्रदर्शनी में दर्शकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई और यह आयोजन अपने अनुशासित संचालन के लिए चर्चित रहा।

विक्रम सिंह राघव ने प्रदर्शनी के दौरान हर स्टॉल, झूले और सांस्कृतिक मंच का निरीक्षण किया। उन्होंने सुनिश्चित किया कि कोई भी काम बिना तैयारी के न हो। जब 2023 में एक झूले में तकनीकी गड़बड़ी के कारण हादसा हुआ, तो उन्होंने तत्काल पूरे झूला सेक्शन को बंद कर जांच के आदेश दिए और सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया। यह कदम उनकी सतर्कता और जनता की सुरक्षा के प्रति संवेदनशीलता का उदाहरण था।

जनहित के कार्यों में भी विक्रम सिंह राघव हमेशा अग्रणी रहे। चंबल और यमुना नदी में आई बाढ़ के समय उन्होंने नाव से प्रभावित गांवों का दौरा किया, राहत शिविरों का निरीक्षण किया और खुद वितरण कार्यों की निगरानी की। इससे प्रशासनिक तंत्र में नई ऊर्जा आई और लोगों ने उन्हें “फील्ड पर रहने वाले अधिकारी” के रूप में सराहा।

उनकी कार्यशैली का सबसे बड़ा गुण यह है कि वे केवल आदेश देने वाले अधिकारी नहीं हैं, बल्कि मैदान में उतरकर समस्याओं को समझने वाले प्रशासक हैं। चाहे प्रदर्शनी की भीड़ हो या रात में रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था, वे खुद मौजूद रहते हैं। स्थानीय मीडिया और नागरिक संगठनों ने कई बार उनकी इस ‘जमीनी प्रतिबद्धता’ की सराहना की है।

एक अधिकारी के रूप में वे न केवल अनुशासित हैं बल्कि मानवीय दृष्टिकोण भी रखते हैं। वे मानते हैं कि प्रशासनिक सेवा का मूल उद्देश्य जनता के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाना है। इसी सोच के साथ वे योजनाओं को धरातल पर लागू करते हैं और शिकायतों का त्वरित समाधान करते हैं।

विक्रम सिंह राघव की निजी जिंदगी भी अनुशासन और सादगी से भरी है। उन्हें शारीरिक स्वास्थ्य का ध्यान रखना, क्रिकेट देखना और प्रेरणादायक फिल्में देखना पसंद है। उनकी पसंदीदा फिल्म “दंगल” है, जो संघर्ष और आत्मविश्वास की कहानी है, बिलकुल उनके जीवन की तरह। अपने ज्ञान और कार्यक्षमता से विक्रम सिंह राघव ने यह साबित किया है कि एक अच्छा अधिकारी वही है जो जनता के दिल में जगह बनाए।

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Ashish Bajpai
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