समाज और राजनीति को समर्पित इटावा के समाजवादी नेता वीरू भदौरिया

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ठा. वीर भान सिंह भदौरिया, जिन्हें इटावा जनपद में लोग प्रेम से वीरू भदौरिया कहते हैं, का जन्म 2 अप्रैल 1970 को उदी, इटावा में हुआ। ग्रामीण इलाके में जन्मे वीरू भदौरिया के पिता स्व. श्री बजरंग सिंह भदौरिया और माता स्व. श्रीमती सावित्री ने उन्हें बचपन से ही सादगी, ईमानदारी और सेवा के संस्कार दिए। यही कारण रहा कि बाल्यकाल से ही उनके भीतर नेतृत्व की झलक दिखाई देती थी और वे समाज के लिए कुछ करने का संकल्प अपने मन में पाल चुके थे।

उनका परिवार हमेशा उनके लिए प्रेरणा का स्रोत रहा। पत्नी श्रीमती इंदिरा सिंह ने जीवन के हर उतार-चढ़ाव में उनका साथ निभाया। पुत्र विकास भदौरिया और डॉ. अभय प्रताप सिंह ने शिक्षा और समाज में अपनी पहचान बनाई और पिता की सेवा भावना को आगे बढ़ाया। वर्ष 2009 में उनकी पुत्री शालू का असमय निधन एक सड़क दुर्घटना में हुआ। यह घटना उनके जीवन का सबसे बड़ा आघात थी, लेकिन उन्होंने इस दर्द को भी समाजहित में बदलते हुए उसकी स्मृति में शालू फिलिंग स्टेशन की स्थापना की।

राजनीतिक जीवन की शुरुआत उन्होंने 1989 में जतना दल की छात्र सभा से की, जब वे ब्लॉक बढ़पुरा के अध्यक्ष चुने गए। इस भूमिका ने उन्हें युवाओं की समस्याओं से सीधे जुड़ने का अवसर दिया। उस दौर में वे न केवल छात्र हितों के लिए संघर्षरत रहे, बल्कि युवाओं को राजनीति और संगठन की ताकत से भी परिचित कराते रहे। इससे उनका कद छात्रों और नौजवानों के बीच लगातार बढ़ता गया।

1992 में जब स्व. मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी की स्थापना की, तब से ही वीरू भदौरिया इस विचारधारा के साथ मजबूती से जुड़े। उन्होंने गांव-गांव जाकर समाजवादी नीतियों का प्रचार-प्रसार किया और पार्टी संगठन को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई। उस समय पार्टी को जनपद स्तर पर जिन समर्पित कार्यकर्ताओं की ज़रूरत थी, उनमें वीरू भदौरिया का नाम सबसे आगे रहा।

उनकी मेहनत और कार्यकुशलता को देखते हुए वर्ष 2000 में उन्हें मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड का प्रदेश सचिव बनाया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने प्रदेशभर में युवाओं को समाजवादी विचारधारा से जोड़ा। उनकी संगठन क्षमता और ऊर्जावान नेतृत्व शैली के कारण वे राज्यस्तर पर भी एक पहचाना जाने वाला चेहरा बन गए।

लेकिन वर्ष 2004 में कुछ स्थानीय नेताओं के व्यवहार से आहत होकर उन्होंने समाजवादी पार्टी से इस्तीफा दे दिया। इस निर्णय ने जिले की राजनीति में हलचल मचा दी। हालांकि उन्होंने पार्टी छोड़ी, लेकिन शीर्ष नेतृत्व और समाजवादी विचारधारा के प्रति उनका सम्मान कभी कम नहीं हुआ। यह उनकी सिद्धांतप्रियता का प्रमाण था कि परिस्थितियाँ चाहे कैसी भी हों, उनके विश्वास और आदर्श अडिग रहे।

पार्टी से अलग होने के बाद भी उनकी सक्रियता खत्म नहीं हुई। बहुजन समाजवादी पार्टी ने उनकी लोकप्रियता और संगठन क्षमता को देखते हुए उन्हें मंडल कोऑर्डिनेटर बनाया। जल्द ही वे जोनल कोऑर्डिनेटर तक पहुँचे। इन पदों पर रहते हुए उन्होंने पार्टी विस्तार और जनता से जुड़ाव में अहम भूमिका निभाई। उनकी ईमानदारी और मेहनत ने उन्हें  बहुजन समाजवादी पार्टी में भी सम्मान दिलाया।

2008 में वे व्यापार मंडल के जिलाध्यक्ष बने। इस दौरान उन्होंने छोटे और मझोले व्यापारियों की समस्याओं को मजबूती से प्रशासन और सरकार तक पहुँचाया। चाहे टैक्स से जुड़ी समस्या हो या स्थानीय स्तर पर सुरक्षा का सवाल, वीरू भदौरिया ने हमेशा व्यापारियों की आवाज को ताकत दी। इस कारण उन्हें व्यापारी वर्ग का सच्चा प्रतिनिधि माना गया।

वर्ष 2012 में उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में बड़ा योगदान दिया और पारपट्टी के ग्राम कामेत में क० अर्जुन सिंह भदौरिया महाविद्यालय की स्थापना की। यह संस्थान खासकर ग्रामीण क्षेत्र की बेटियों के लिए वरदान साबित हुआ। पहले जहां बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए शहरों का रुख करना पड़ता था, अब उन्हें अपने गांव में ही बेहतर शिक्षा उपलब्ध हो गई। इस पहल से न केवल बेटियों को शिक्षा मिली बल्कि पूरे क्षेत्र का शैक्षिक स्तर भी ऊँचा हुआ।

समाजसेवा उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा रहा। गरीब परिवारों की आर्थिक सहायता करना, जरूरतमंद छात्रों की फीस भरना, विधवाओं और असहायों को सहयोग देना उनकी दिनचर्या का हिस्सा था। उन्होंने कई बार अनाथ बच्चों की पढ़ाई का जिम्मा भी उठाया। यही नहीं, उन्होंने समय-समय पर मुफ्त स्वास्थ्य शिविर आयोजित कराए और ग्रामीणों को दवा व इलाज उपलब्ध कराया।

कोविड-19 महामारी के समय उनकी समाजसेवा और भी स्पष्ट दिखाई दी। उन्होंने लॉकडाउन के दौरान जरूरतमंद परिवारों तक राशन, दवाइयाँ और भोजन पहुँचाया। मजदूरों और गरीब परिवारों की सहायता के लिए वे खुद आगे आए। संकट की घड़ी में उनकी यह सेवा जनता के दिलों में गहरी छाप छोड़ गई।

किसानों की समस्याओं के लिए भी वे हमेशा संघर्षरत रहे। उन्होंने किसानों की समस्याओं को जिला प्रशासन तक पहुँचाया और उनके निराकरण की मांग उठाई। किसानों के बीच उनकी छवि एक सच्चे हमदर्द और प्रतिनिधि की रही। इसके अलावा उन्होंने ग्रामीण इलाकों में सड़क, पानी और बिजली जैसी बुनियादी सुविधाओं को उपलब्ध कराने के लिए भी काम किया।

युवाओं और खेलों को प्रोत्साहन देना भी उनके कार्यों का हिस्सा रहा। वे अक्सर खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेते और विजेताओं को प्रोत्साहन व पुरस्कार देते। उनका मानना था कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा देना ही समाज और देश के भविष्य को सुरक्षित करने का रास्ता है।

वर्ष 2021 में अंशुल यादव के प्रयास और राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के निर्देश पर वे पुनः समाजवादी पार्टी में लौटे। यह वापसी उनके लिए भावनात्मक और गर्व का क्षण थी। वर्तमान में वे समाजवादी पार्टी के जिला महामंत्री के रूप में कार्यरत हैं और संगठन की मजबूती, युवाओं की भागीदारी और समाजवादी विचारधारा के प्रसार में सक्रिय हैं।

ठा. बीर भान सिंह भदौरिया का जीवन राजनीति और समाजसेवा का आदर्श संगम है। उन्होंने छात्र राजनीति से शुरुआत कर समाजवादी पार्टी में ऊँचे पद तक पहुँचने तक के सफर में हमेशा जनता को प्राथमिकता दी। व्यक्तिगत दुखों को भी समाजहित में बदलने की उनकी क्षमता उन्हें विशिष्ट बनाती है।

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Ashish Bajpai
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