इटावा की राजनीति में सादगी और सेवा की मिसाल बने समाजवादी नेता सर्वेश शाक्य

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सर्वेश शाक्य जनपद इटावा के एक ऐसे नाम हैं जिन्होंने शिक्षा, सेवा और सादगी को जीवन का मूल मंत्र बनाया। उनका पूरा जीवन इस विचार के इर्द-गिर्द घूमता है कि समाज में बदलाव लाने का सबसे सशक्त माध्यम शिक्षा है। समाजवादी विचारधारा से प्रेरित सर्वेश शाक्य ने विरासत में राजनीति की मिलने के बावजूद शिक्षा को ही अपना पेशा बनाया और उसी में जनसेवा का मार्ग खोजा।

सर्वेश शाक्य का जन्म 15 मार्च 1973 को ग्राम चम्पानेर, जनपद इटावा में हुआ। वे एक ऐसे परिवार से आते हैं जिसकी जड़ें राजनीति और लोकसेवा में गहराई से जुड़ी रही हैं। उनके पिता राम सिंह शाक्य तीन बार सांसद रहे — 1980, 1989 और 1996 में उन्होंने संसद में इटावा की आवाज़ बुलंद की। सर्वेश शाक्य के जीवन में उनकी माँ स्व. महादेवी शाक्य का योगदान गहराई से झलकता है। वे न केवल एक संस्कारवान मां थीं बल्कि एक संवेदनशील और संघर्षशील महिला भी रहीं, जिन्होंने अपने परिवार को नैतिकता, धैर्य और शिक्षा के मूल्य सिखाए।।

सर्वेश शाक्य के जीवन में परिवार का भी गहरा योगदान रहा है। उनकी पत्नी प्रतिभा शाक्य हमेशा उनके साथ खड़ी रहीं और शिक्षा व समाजसेवा के कार्यों में उनका सहयोग करती रहीं। उनके दोनों बच्चे रुपाली शाक्य और यशवर्धन शाक्य भी शिक्षा और संस्कार की उसी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं, जो परिवार की पहचान है।

अपने बाल्यकाल से ही सर्वेश शिक्षा के प्रति अत्यधिक समर्पित रहे। पढ़ाई के दौरान उनका झुकाव समाज की वास्तविक परिस्थितियों को समझने की ओर था। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त कर परास्नातक की डिग्री हासिल की और युवाओं के बीच शिक्षा की रोशनी फैलाने का संकल्प लिया। वे मानते हैं कि कोई भी समाज तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक उसके नागरिक शिक्षित और जागरूक न हों।

शिक्षक जीवन की शुरुआत उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र से की, जहाँ संसाधनों की कमी थी लेकिन उनके मन में बदलाव का उत्साह अपार था। उन्होंने बच्चों में सीखने की लगन और संस्कार दोनों जगाने का कार्य किया। यही समर्पण उन्हें शिक्षक से प्रधानाचार्य की भूमिका तक ले गया। लालाराम इंटर कॉलेज, चम्पानेर में उन्होंने प्रधानाचार्य रहते हुए विद्यालय को नई दिशा दी और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार किया।

बेसिक शिक्षा परिषद में भी उन्होंने सहायक अध्यापक और प्रधानाध्यापक के रूप में कार्य किया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीण इलाकों के सैकड़ों बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ा। उनका विश्वास था कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने का माध्यम नहीं बल्कि जीवन सुधार का सबसे पवित्र मार्ग है। उनकी इस सोच ने उन्हें हजारों विद्यार्थियों के बीच प्रेरणा का प्रतीक बना दिया।

वर्तमान में सर्वेश शाक्य लालाराम महाविद्यालय के प्रबंधक के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने इस संस्थान को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित किया और शिक्षा को सामाजिक जागरूकता से जोड़ने की पहल की। उनके नेतृत्व में कॉलेज ने क्षेत्र में एक नई पहचान स्थापित की है। वे विद्यार्थियों को न केवल पढ़ाई बल्कि व्यवहारिक जीवन के मूल्यों की शिक्षा देने पर भी बल देते हैं।

उनकी व्यक्तिगत छवि मृदुभाषी, सरल और मिलनसार व्यक्ति की रही है। लोग उन्हें सहज संवाद और संवेदनशील व्यवहार के लिए जानते हैं। चाहे गाँव का किसान हो या शहर का विद्यार्थी, हर कोई उनसे खुलकर बात कर सकता है। वे किसी भी सामाजिक या शैक्षिक आयोजन में बिना औपचारिकता के भाग लेते हैं और लोगों की समस्याओं को धैर्यपूर्वक सुनते हैं।

सर्वेश शाक्य का मानना है कि राजनीति यदि शिक्षा और सेवा के साथ जुड़ जाए तो उसका उद्देश्य और अधिक सार्थक हो जाता है। इसी सोच के चलते  समाजवादी पार्टी ने 2022 में उनकी लोकप्रियता, ईमानदारी और जनसेवा को देखते हुए उन्हें इटावा विधानसभा सीट से प्रत्याशी बनाया। यह निर्णय समाजवादी पार्टी की सोच का प्रमाण था कि सच्चे शिक्षाविद् भी राजनीति में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।

उन्होंने पूरे समर्पण के साथ चुनाव लड़ा और जनता से अपील की कि इटावा को शिक्षा, रोजगार और विकास के क्षेत्र में अग्रणी बनाना उनका लक्ष्य है। चुनाव में उन्होंने सरिता भदौरिया के विरुद्ध मजबूत संघर्ष किया और 94 हज़ार से अधिक मत प्राप्त किए। वे मात्र 3,984 मतों से पराजित हुए, परंतु जनता के बीच उनकी छवि एक सच्चे और ईमानदार जनसेवक की बन गई।

राजनीतिक हार को उन्होंने अपने जीवन का अंत नहीं बल्कि नई शुरुआत माना। चुनाव के बाद भी उन्होंने अपने क्षेत्र में समाजसेवा और शिक्षा सुधार का कार्य जारी रखा। वे कहते हैं कि सेवा पद से नहीं, भावना से होती है। यही विचार उन्हें दूसरों से अलग बनाता है और यही कारण है कि उनके समर्थकों की संख्या निरंतर बढ़ती जा रही है।

उन्होंने कभी भी दिखावे की राजनीति नहीं की। उनके कार्यों में विनम्रता और सादगी झलकती है। लोगों का कहना है कि सर्वेश शाक्य जैसे नेता सत्ता नहीं, सेवा की भाषा समझते हैं। यही कारण है कि वे चाहे किसी पद पर हों या न हों, लोगों के दिलों में उनका स्थान हमेशा बना रहता है।

उनका यह विश्वास रहा है कि समाज का उत्थान तभी संभव है जब हर व्यक्ति अपनी भूमिका को समझे। उन्होंने अपने जीवन को इस विचार के अनुरूप ढाला कि “यदि एक शिक्षक ईमानदारी से पढ़ाए, तो एक पीढ़ी सुधर सकती है।” इस विचार ने उनके हर कार्य में दिशा और प्रेरणा दी।

वे अब भी जनपद इटावा के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में सक्रिय हैं। लोगों से जुड़ने, युवाओं को प्रेरित करने और समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाने का कार्य वे निरंतर करते हैं। उनके विचारों में आक्रोश नहीं, समाधान की भावना होती है। वे राजनीति को संघर्ष नहीं, सहयोग का माध्यम मानते हैं।

सर्वेश शाक्य आज इटावा के उन कुछ चेहरों में से हैं जो राजनीति को एक मिशन की तरह निभा रहे हैं। उन्होंने शिक्षण, समाजसेवा और जनसंपर्क को एक साथ जोड़ा और यह साबित किया कि यदि नीयत साफ हो, तो हर क्षेत्र में सफलता मिल सकती है। वे आज भी सादगी, समर्पण और सजगता की मिसाल बने हुए हैं।

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Ashish Bajpai
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