सर मदनलाल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मेसी इटावा द्वारा आयोजित तीन दिवसीय वर्चुअल फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम रीइमेजिनिंग फार्मेसी एजुकेशन: इनोवेशन, रिसर्च एंड प्रोफेशनल एक्सीलेंस का 19 जुलाई 2026 को सफलतापूर्वक समापन हुआ। समापन सत्र में शिक्षकों और प्रतिभागियों को नवाचार, अनुसंधान तथा पेशेवर नैतिकता के महत्वपूर्ण पहलुओं से अवगत कराया गया।

कार्यक्रम के अंतिम दिन मुख्य वक्ता के रूप में डॉ. भरत मिश्रा डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, लखनऊ ने बियॉन्ड द क्लासरूम: इनोवेशन, रिसर्च एंड प्रोफेशनल एथिक्स विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने उच्च शिक्षा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए बताया कि यह तकनीक शिक्षण, अधिगम, शोध, वैज्ञानिक लेखन, मूल्यांकन तथा शैक्षणिक प्रशासन में महत्वपूर्ण बदलाव ला रही है।
डॉ. मिश्रा ने एआई के लाभ और सीमाओं पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर बल दिया। उन्होंने कहा कि उभरती तकनीकों को अपनाते समय शैक्षणिक ईमानदारी, आलोचनात्मक सोच और पेशेवर नैतिकता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके व्यावहारिक उदाहरणों और दूरदर्शी विचारों को प्रतिभागियों ने सराहा।
व्याख्यान के बाद आयोजित प्रश्नोत्तर सत्र में प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, शोध तथा पेशेवर नैतिकता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा की।
यह कार्यक्रम डॉ. विवेक यादव, चेयरमैन, सर मदनलाल ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. यू.एस. शर्मा निदेशक रहे, जबकि संचालन सुश्री पारिका ठाकुर एसोसिएट प्रोफेसर, फार्मास्यूटिक्स विभाग ने किया।
आयोजन समिति ने सभी विशिष्ट वक्ताओं, प्रतिभागियों, शिक्षकों एवं आयोजकों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस प्रकार के शैक्षणिक कार्यक्रम फार्मेसी शिक्षा को नवाचार, अनुसंधान, तकनीक और पेशेवर उत्कृष्टता के नए आयाम प्रदान करते हैं। तीन दिवसीय यह कार्यक्रम शिक्षकों और शोधकर्ताओं के लिए ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक साबित हुआ।
