राजनीति, कर्मचारी आंदोलन और शिक्षा, हरि किशोर तिवारी की बहुआयामी पहचान

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इंजीनियर हरि किशोर तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश के कर्मचारी आंदोलन, राजनीति और शिक्षा जगत में एक जाना-पहचाना नाम है। उन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से निकलकर ऐसा मुकाम हासिल किया जो बहुत कम लोगों को नसीब होता है। इटावा जनपद में जन्मे हरि किशोर तिवारी को उनके पिता श्री किशोर तिवारी एवं बड़े भाई चंद किशोर तिवारी का विशेष आशीर्वाद मिला। यही पारिवारिक संस्कार और पिता और बड़े भाई का का मार्गदर्शन उन्हें ईमानदारी, संघर्ष और समाजसेवा की राह पर ले आया।

उनका परिवार भी समाज और शिक्षा की सेवा में गहराई से जुड़ा हुआ है। उनकी पत्नी मधु तिवारी हमेशा उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहीं। उनके पुत्र मेजर डॉ. निकुंज तिवारी जो सेना में सेवायें दे रहे है ने समाज के लिए अपने शरीर के सभी अंग दान कर एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया। यह कदम पूरे प्रदेश और देश में प्रेरणास्रोत बना। उनके दूसरे पुत्र अंकित तिवारी नारायण कॉलेज के वाइस चेयरमैन हैं और उन्हें हाल ही में “उत्कृष्ट छात्रावास” प्रबंधन के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। अंकित तिवारी की पत्नी और हरि किशोर तिवारी की पुत्रवधू डॉ. श्रेता तिवारी संस्थान की चीफ़ एडवाइज़र हैं और शैक्षिक गुणवत्ता सुधारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी उन्होंने उत्कृष्ट उपलब्धि हासिल की। उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया और एम.ए. (अर्थशास्त्र) की उपाधि प्राप्त की। तकनीकी शिक्षा और सामाजिक विज्ञान का यह अनूठा संगम उनके व्यक्तित्व को और भी बहुआयामी बना गया। पढ़ाई के दिनों में ही उनका झुकाव छात्र राजनीति की ओर हुआ और उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से सक्रियता की शुरुआत की।

छात्र राजनीति में उनकी लोकप्रियता तब और बढ़ी जब उन्हें हाथरस पाली टेक्निकल कॉलेज का जनरल सेक्रेटरी चुना गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने छात्रों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया और संघर्ष का रास्ता अपनाया। यही वह दौर था जिसने उन्हें संगठित नेतृत्व और संघर्षशीलता का वास्तविक अनुभव दिया।

शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कर्मचारियों के हितों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया। वे डिप्लोमा इंजीनियर यूनियन से जुड़े और वहां जिलाध्यक्ष तथा क्षेत्रीय अध्यक्ष बने। इस पद पर रहते हुए उन्होंने कर्मचारियों की सेवा शर्तों, पेंशन और अन्य सुविधाओं के लिए लगातार संघर्ष किया। धीरे-धीरे वे कर्मचारियों की आवाज़ बनते चले गए और उनका नाम राज्य स्तर पर गूंजने लगा।

साल 2012 में उनके जीवन का एक अहम मोड़ आया, जब वे राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद (उत्तर प्रदेश) के प्रदेश अध्यक्ष चुने गए। यह पद उन्हें कर्मचारियों के विश्वास और समर्थन से हासिल हुआ। इसके बाद लगातार पाँच बार इस पद पर निर्वाचित होना उनकी नेतृत्व क्षमता और लोकप्रियता को स्पष्ट करता है। उनके नेतृत्व में कर्मचारियों का बड़ा आंदोलन खड़ा हुआ और उन्होंने बार-बार सरकार को पुरानी पेंशन बहाली जैसे मुद्दों पर बातचीत करने के लिए मजबूर किया।

कर्मचारियों की आवाज़ को संगठित तरीके से उठाने की उनकी शैली अनुकरणीय रही है। उन्होंने हमेशा अहिंसा और अनुशासन को प्राथमिकता दी और संघर्ष को अराजकता में बदलने से रोका। यही कारण है कि वे न केवल कर्मचारियों में बल्कि सरकार और प्रशासन के बीच भी एक गंभीर और जिम्मेदार नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।

कर्मचारी आंदोलन के साथ-साथ उन्होंने राजनीति में भी अपनी भूमिका निभाई। 2019 में उन्होंने आगरा स्नातक मतदाय क्षेत्र से एमएलसी चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा। इस चुनाव में उन्हें लगभग 23,000 वोट मिले, जो किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार के लिए अब तक का सबसे बड़ा समर्थन था। भले ही वे चुनाव नहीं जीत पाए, लेकिन इस चुनाव ने उनकी लोकप्रियता को व्यापक स्तर पर स्थापित कर दिया।

बाद में वे समाजवादी पार्टी से जुड़े और 2021 में अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी की सदस्यता ग्रहण की। समाजवादी विचारधारा से जुड़कर उन्होंने कर्मचारियों और समाज के हक की लड़ाई को राजनीतिक मंच तक पहुँचाया। लेकिन 2024 में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी का दामन थामा और भाजपा नेताओं की मौजूदगी में सदस्यता ग्रहण की। यह निर्णय उनके राजनीतिक जीवन का नया अध्याय था, जो यह दिखाता है कि वे समाजसेवा और नेतृत्व को और व्यापक स्तर तक ले जाना चाहते हैं।

शिक्षा के क्षेत्र में भी हरि किशोर तिवारी का योगदान उल्लेखनीय है। वे नारायण ग्रुप ऑफ़ इंस्टीट्यूशन्स के चेयरमैन हैं और इस संस्थान को उत्कृष्ट शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन देने में उनकी भूमिका केंद्रीय रही है। उनके प्रयासों से संस्थान ने प्रदेश में एक अलग पहचान बनाई है। उनका मानना है कि शिक्षा ही समाज परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है।

हरि किशोर तिवारी के नेतृत्व और योगदान को केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं किया जा सकता। वे कर्मचारी आंदोलन, राजनीति, शिक्षा और समाजसेवा—सभी क्षेत्रों में सक्रिय हैं। उनका जीवन यह दर्शाता है कि ईमानदारी और संघर्ष के बल पर कोई भी व्यक्ति समाज में गहरी छाप छोड़ सकता है।

आज हरि किशोर तिवारी न केवल एक कर्मचारी नेता बल्कि एक शिक्षाविद, समाजसेवी और जननेता के रूप में सम्मानित किए जाते हैं। उनके पिता श्री किशोर तिवारी का आशीर्वाद और परिवार का सहयोग हमेशा उनके साथ रहा है, जिसने उन्हें जनहित की इस यात्रा को और सशक्त बनाया। यही कारण है कि वे प्रदेश के उन चुनिंदा नेताओं में गिने जाते हैं जिनका नाम संघर्ष और सेवा दोनों का प्रतीक है।

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Ashish Bajpai
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