‘लपेटे में नेताजी’ से देश के घर-घर तक पहुँची कवि अवनीश त्रिपाठी की आवाज

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इटावा की धरती ने समय-समय पर ऐसी प्रतिभाओं को जन्म दिया है, जिन्होंने अपनी मेहनत, प्रतिभा और समर्पण के बल पर राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। कवि, व्यंग्यकार, शिक्षक और मंचीय कलाकार अवनीश त्रिपाठी उन्हीं चुनिंदा व्यक्तित्वों में शामिल हैं, जिन्होंने अपनी रचनात्मक ऊर्जा और शब्दों की शक्ति से लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई है। आज उनका नाम हिंदी मंचीय कविता और राजनीतिक व्यंग्य के क्षेत्र में सम्मान के साथ लिया जाता है।

10 जुलाई 1988 को इटावा में जन्मे अवनीश त्रिपाठी का बचपन एक शिक्षित और संस्कारित परिवार में बीता। उनके पिता शिव सेवक त्रिपाठी कृषि विभाग में ADO पद से सेवानिवृत्त अधिकारी रहे हैं, जबकि माता सुशीला त्रिपाठी ने उन्हें संस्कार, अनुशासन और सामाजिक मूल्यों की सीख दी। परिवार से मिले इन्हीं संस्कारों ने उनके व्यक्तित्व को गहराई और संवेदनशीलता प्रदान की।

प्राथमिक शिक्षा इटावा के थियोसोफिकल इंटर कॉलेज तथा इस्लामिया इंटर कॉलेज में प्राप्त करने वाले अवनीश बचपन से ही मेधावी छात्र रहे। छात्र जीवन में उनकी पहचान एक उत्कृष्ट वक्ता के रूप में बन चुकी थी। उन्होंने 50 से अधिक वाद-विवाद प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और अधिकांश में प्रथम स्थान प्राप्त किया। विशेष बात यह रही कि वे अक्सर विपक्ष के पक्ष में बोलते हुए भी अपनी तार्किक क्षमता और प्रभावशाली प्रस्तुति से निर्णायकों को प्रभावित कर देते थे।

शिक्षा के प्रति उनकी गंभीरता का परिणाम था कि उन्होंने मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बी.टेक की डिग्री प्राप्त की। इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने गुरुग्राम और रोहतक की प्रतिष्ठित ऑटोमोबाइल कंपनियों में क्वालिटी इंजीनियर के रूप में कार्य किया। तकनीकी क्षेत्र में सफल करियर की संभावनाओं के बावजूद परिस्थितियों ने उन्हें इटावा बापस लौटने के लिए प्रेरित किया।

इटावा लौटने के बाद उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र को अपना कर्मक्षेत्र बनाया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे विद्यार्थियों को गणित पढ़ाना शुरू किया। उनकी सहज और व्यावहारिक शिक्षण शैली ने हजारों युवाओं का भविष्य संवारा। आज उनके पढ़ाए हुए अनेक छात्र पुलिस, बैंकिंग, लेखपाल तथा विभिन्न सरकारी सेवाओं में कार्यरत हैं। एक शिक्षक के रूप में उनका योगदान उतना ही महत्वपूर्ण है जितना एक कवि के रूप में।

साल 2017 उनके जीवन का वह मोड़ साबित हुआ जिसने उनकी पहचान को नया आयाम दिया। इसी वर्ष उन्होंने मंचीय कविता और लेखन को गंभीरता से अपनाया। सामाजिक विसंगतियों, राजनीतिक घटनाओं और आम जनमानस की समस्याओं को अपनी रचनाओं का विषय बनाकर उन्होंने हिंदी साहित्य और मंचीय कविता की दुनिया में प्रवेश किया। बहुत कम समय में उनकी रचनाएँ श्रोताओं के बीच लोकप्रिय होने लगीं।

उनकी प्रतिभा को पहला बड़ा राष्ट्रीय मंच तब मिला जब देशभर से चयनित युवा कवियों की प्रतियोगिता में उनका चयन हुआ और उन्हें दिल्ली पुस्तकालय में आयोजित राष्ट्रीय काव्य मंच पर कविता पाठ का अवसर प्राप्त हुआ। इस प्रस्तुति ने उन्हें साहित्यिक जगत में नई पहचान दिलाई और राष्ट्रीय स्तर पर उनके लिए अनेक संभावनाओं के द्वार खोले।

राष्ट्रीय मीडिया में उनकी यात्रा समाचार प्लस चैनल से शुरू हुई, जहाँ उन्होंने पहली बार टीवी पर कविता पाठ किया। इसके बाद Zee News, News Nation, ABP News और सूर्या समाचार जैसे प्रमुख समाचार चैनलों पर उनकी प्रस्तुतियाँ लगातार प्रसारित होने लगीं। उनकी सशक्त अभिव्यक्ति और व्यंग्यात्मक शैली ने दर्शकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया।

वर्ष 2019 में उनकी लोकप्रियता को नई ऊँचाई तब मिली जब वे News18 India के चर्चित कार्यक्रम ‘लपेटे में नेताजी’ से जुड़े। हास्य, व्यंग्य और राजनीतिक सटायर पर आधारित इस कार्यक्रम में उनकी प्रस्तुति ने लाखों दर्शकों को प्रभावित किया। वे आज भी इस कार्यक्रम का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और 150 से अधिक एपिसोड में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर चुके हैं।

अवनीश त्रिपाठी की विशेषता केवल कविता तक सीमित नहीं है। वे अपने व्यंग्य को और प्रभावी बनाने के लिए मिमिक्री, अभिनय और संवाद शैली का भी कुशलतापूर्वक उपयोग करते हैं। फिल्मों के प्रसिद्ध किरदारों, संवादों और परिस्थितियों को समकालीन राजनीति से जोड़कर वे ऐसा व्यंग्य रचते हैं जो दर्शकों को हँसाने के साथ-साथ सोचने के लिए भी विवश कर देता है।

वर्ष 2024 में उनका एक व्यंग्य “मेरी ED की समस्या बढ़ती जा रही थी…” सोशल मीडिया पर अभूतपूर्व रूप से वायरल हुआ। विभिन्न डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इस प्रस्तुति को 10 करोड़ से अधिक बार देखा गया। इस सफलता ने उन्हें देश के सबसे चर्चित युवा राजनीतिक व्यंग्यकारों में शामिल कर दिया।

उनकी लोकप्रियता का अनुमान इसी बात से लगाया जा सकता है कि देश के प्रमुख राजनीतिक नेताओं राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और तेजस्वी यादव तक उनके व्यंग्य साझा कर चुके हैं। किसी मंचीय कवि और व्यंग्यकार के लिए यह उपलब्धि इस बात का प्रमाण है कि उसकी बात आम जनता ही नहीं, बल्कि देश के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व तक पहुँच रही है।

हाल के वर्षों में उन्होंने दूरदर्शन लखनऊ के लोकप्रिय कार्यक्रम ‘Once More’ में भी अपनी प्रस्तुति दी। इसके अलावा उन्हें शैलेश लोढ़ा के चर्चित काव्य कार्यक्रम ‘वाह भाई वाह’ में कविता पाठ के लिए मुंबई आमंत्रित किया गया। राष्ट्रीय मंचों पर उनकी बढ़ती लोकप्रियता के चलते अनेक साहित्यिक और सामाजिक संस्थाओं द्वारा उन्हें सम्मानित किया जा चुका है। आगरा के ताज साहित्य उत्सव में अभिनेता राजपाल यादव द्वारा सम्मानित किया जाना उनकी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है।

साहित्य के साथ-साथ खेलों में भी उनकी विशेष रुचि रही है। इटावा नुमाइश द्वारा आयोजित स्नूकर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त कर उन्होंने यह साबित किया कि प्रतिभा केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं होती। उनकी बहुआयामी रुचियाँ उनके व्यक्तित्व को और अधिक प्रभावशाली बनाती हैं।

समाजसेवा और युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना भी उनके जीवन का महत्वपूर्ण उद्देश्य है। वे समय-समय पर सामाजिक विषयों पर अपनी कविताओं और वक्तव्यों के माध्यम से जागरूकता फैलाते हैं। साथ ही नवोदित कवियों और युवा रचनाकारों को मंच उपलब्ध कराने तथा उन्हें आगे बढ़ाने के लिए सदैव प्रयासरत रहते हैं।

व्यक्तिगत जीवन में अवनीश त्रिपाठी एक सरल, संवेदनशील और पारिवारिक व्यक्ति हैं। उनकी पत्नी संध्या त्रिपाठी उनके हर सामाजिक और साहित्यिक प्रयास में सहयोगी हैं, जबकि पुत्र विट्ठल त्रिपाठी उनके जीवन की प्रेरणा हैं। परिवार, समाज, शिक्षा और साहित्य के बीच संतुलन स्थापित करना उनके व्यक्तित्व की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक है।

अवनीश त्रिपाठी केवल एक कवि या व्यंग्यकार नहीं, बल्कि इटावा की सांस्कृतिक चेतना और नई पीढ़ी की रचनात्मक आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनकी यात्रा इस बात का जीवंत उदाहरण है कि प्रतिभा, परिश्रम और निरंतरता के बल पर छोटे शहरों से निकलकर भी राष्ट्रीय मंचों पर अमिट पहचान बनाई जा सकती है।

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Ashish Bajpai
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