कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व में नई ऊँचाइयों की ओर बढ़ता सैफई विश्वविद्यालय

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प्रोफेसर (डॉ.) अजय सिंह चिकित्सा शिक्षा और प्रशासनिक नेतृत्व की दुनिया में एक जाना-माना नाम हैं, जिन्होंने चार दशकों से अधिक का अनुभव अर्जित किया है। बाल अस्थि रोग यानी पेडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स के क्षेत्र में उनकी पहचान राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थापित है। उनका जीवन संघर्ष, शिक्षा और समर्पण की ऐसी मिसाल है, जिसने चिकित्सा जगत को नई दिशा और दृष्टि प्रदान की है।

5 अगस्त 2025 को उन्होंने उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के कुलपति के रूप में कार्यभार संभाला। यह उनके लंबे और गौरवशाली करियर का एक नया अध्याय है। कार्यभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य केवल बेहतर चिकित्सा शिक्षा देना ही नहीं है, बल्कि आम जनता को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना भी है। उनका मानना है कि शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा, दोनों को एक साथ लेकर चलना ही किसी भी चिकित्सा संस्थान की असली पहचान है।

उन्होंने अपनी प्रारंभिक चिकित्सा शिक्षा 1985 में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज, लखनऊ से एमबीबीएस करके पूरी की। इसके बाद 1989 में उन्होंने ऑर्थोपेडिक सर्जरी में स्नातकोत्तर की डिग्री प्राप्त की। छात्र जीवन से ही उनमें चिकित्सा क्षेत्र के प्रति समर्पण और अनुसंधान की गहरी रुचि थी, जिसके कारण उन्होंने अपने करियर की दिशा बाल अस्थि रोग जैसे विशिष्ट और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र की ओर मोड़ी।

सन् 2004 में उन्होंने किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू), लखनऊ में सहायक प्रोफेसर के रूप में अपने शैक्षणिक जीवन की शुरुआत की। उनकी मेहनत, लगन और चिकित्सा क्षेत्र के प्रति गहन रुचि ने उन्हें निरंतर आगे बढ़ाया। सन् 2013 में वे प्रोफेसर बने और 2016 में उन्हें बाल अस्थि रोग विभाग का विभागाध्यक्ष नियुक्त किया गया।

उन्होंने अपने कार्यकाल में केजीएमयू में एक बड़ा परिवर्तन करते हुए भारत का पहला स्वतंत्र बाल अस्थि रोग विभाग स्थापित कराया, जिसमें 25 बेड की यूनिट थी। यह विभाग देशभर के लिए एक मिसाल बना और बच्चों की अस्थि समस्याओं के इलाज के क्षेत्र में एक नए युग की शुरुआत हुई। इसके साथ ही वे एमसीआई और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अनुमोदित एमसीएच सुपर स्पेशलिटी कोर्स को प्रारंभ कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने में सफल रहे।

उनका शैक्षणिक योगदान भी बेहद समृद्ध रहा है। उन्होंने अब तक 9 पुस्तकों का लेखन किया है, 250 वैज्ञानिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं और 106 शोध परियोजनाओं का मार्गदर्शन किया है। इसके अलावा, उन्होंने 318 शोध पत्र राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर प्रस्तुत किए और 228 वैज्ञानिक सम्मेलनों में सक्रिय भागीदारी निभाई। इन योगदानों ने उन्हें चिकित्सा शोध और शिक्षा के क्षेत्र में एक प्रतिष्ठित व्यक्तित्व बना दिया है।

प्रशासनिक जिम्मेदारियों में भी उन्होंने अपनी दक्षता का प्रदर्शन किया। वे फरवरी 2022 से जुलाई 2022 तक पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ चाइल्ड हेल्थ, नोएडा के निदेशक रहे। इसके अतिरिक्त उन्होंने गोरखपुर एम्स, रायपुर एम्स और भोपाल एम्स में भी निदेशक के पद पर कार्य किया। हर जगह उन्होंने संस्थानों को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने का कार्य किया और चिकित्सा सेवाओं को आमजन तक पहुँचाने में सक्रिय योगदान दिया।

एम्स भोपाल में उनके नेतृत्व में अभूतपूर्व परिवर्तन देखने को मिले। वहाँ उनके कार्यकाल के दौरान ओपीडी और आईपीडी मरीजों की संख्या में कई गुना वृद्धि हुई। सर्जरी की संख्या तीन गुना से अधिक बढ़ी और ट्रॉमा व इमरजेंसी सेवाओं में व्यापक सुधार हुआ। उन्होंने वहाँ डिजिटल हेल्थ सेवाओं की शुरुआत कर मरीजों को ऑनलाइन पंजीकरण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराईं।

एम्स भोपाल के दौरान ही उनके मार्गदर्शन में संस्थान ने मध्य भारत में पहली बार रोबोटिक सर्जरी और 3डी प्रिंट असिस्टेड सर्जरी की शुरुआत की। इसके साथ ही हृदय, गुर्दा, कॉर्निया और बोन मैरो प्रत्यारोपण जैसी अत्याधुनिक सेवाओं का भी शुभारंभ हुआ। उन्होंने 106 से अधिक विशेष क्लीनिक स्थापित किए जिनमें ट्रांसजेंडर, किशोरावस्था, वृद्धजन और बांझपन जैसी विशिष्ट श्रेणियों के लिए अलग-अलग सेवाएं दी गईं।

उनके कार्यकाल में एम्स भोपाल ने चिकित्सा शिक्षा, शोध और सेवा को एक साथ जोड़ते हुए कई नए मानक स्थापित किए। बोन बैंक, स्किन बैंक और मिल्क बैंक जैसी सुविधाओं ने चिकित्सा संस्थान को और अधिक सशक्त बनाया। उनकी यह उपलब्धियाँ दर्शाती हैं कि वे केवल चिकित्सक ही नहीं बल्कि एक दूरदर्शी प्रशासक भी हैं।

आज प्रो. (डॉ.) अजय सिंह एक ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनकी यात्रा प्रेरणा का स्रोत है। उनका जीवन यह संदेश देता है कि समर्पण, मेहनत और दूरदर्शिता के साथ यदि कार्य किया जाए तो चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं को समाज के सबसे निचले तबके तक पहुँचाया जा सकता है। उनकी अगुवाई में उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय निश्चय ही नई उपलब्धियों को छूने के लिए तैयार है।

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Ashish Bajpai
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