नुमाइश हर साल ताज़ा करती हैं खजला, सोफ्टी और खेल–खिलौनों वाली बचपन की यादें

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इटावा में आयोजित होने वाली जनपद प्रदर्शनी जिले के सांस्कृतिक और सामाजिक जीवन का प्रमुख आयोजन माना जाता है। यह प्रदर्शनी लगभग एक सदी से अधिक समय से निरंतर लगती आ रही है और शहर के वार्षिक कैलेंडर में इसका विशेष महत्व है। हर वर्ष लाखों लोग इस आयोजन में शामिल होते हैं, जहां व्यापारिक गतिविधियों के साथ-साथ विभिन्न सांस्कृतिक, खेल और शैक्षणिक आयोजन भी संचालित किए जाते हैं। यह आयोजन इटावा की ऐतिहासिक पहचान का प्रमुख आधार बन चुका है।

जनपद प्रदर्शनी की शुरुआत वर्ष 1888 में तत्कालीन जिलाधिकारी एच.के. ग्रेसी द्वारा पक्के तालाब के चारों ओर की गई थी। वर्ष 1893 तक प्रदर्शनी का आयोजन उसी स्थान पर होता रहा। कुछ वर्षों के लिए यह आयोजन बंद हो गया, लेकिन 17 वर्ष बाद 1910 में इसे नए स्थान पर पुनः प्रारंभ किया गया। तब से यह प्रदर्शनी बिना रुके लगातार आयोजित होती रही है और आज यह प्रदेश में अपनी श्रेणी के प्रमुख आयोजनों में गिनी जाती है।

वर्ष 2009 प्रदर्शनी के इतिहास का विशेष अवसर रहा, जब प्रशासनिक स्तर पर इसका शताब्दी वर्ष मनाया गया। इस उत्सव के अंतर्गत प्रदर्शनी को 45 दिनों तक चलाया गया, जो सामान्यतः 30 दिनों तक चलती है। इस वर्ष पहली बार प्रदर्शनी के पंडालों में आयोजित कार्यक्रमों का सीधा प्रसारण टेलीविजन पर किया गया, जिससे बड़ी संख्या में लोग घर से ही कार्यक्रम देखने में सक्षम हुए। इस आयोजन ने प्रदर्शनी को प्रदेश स्तर पर नई पहचान दिलाई।

इटावा की प्रदर्शनी को लोग सामान्य भाषा में ‘नुमाइश’ नाम से भी पहचानते हैं। यह आयोजन न केवल शहर के लोगों के लिए, बल्कि आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों और पड़ोसी जिलों के निवासियों के लिए भी विशिष्ट आकर्षण का केंद्र है। प्रदर्शनी के दौरान शहर में विशेष भीड़ रहती है, जिसमें व्यापारिक गतिविधियां, खरीद–फरोख्त और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां बड़ी संख्या में दिखाई देती हैं। यह आयोजन स्थानीय आर्थिक विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रदर्शनी परिसर के केंद्र में स्थित फव्वारा इस आयोजन का सबसे प्रमुख स्थान माना जाता है, जिसे लोग ‘हृदय स्थल’ के नाम से संबोधित करते हैं। यह वह स्थान है जहां बड़ी संख्या में लोग बैठकर समय व्यतीत करते हैं और अक्सर खोए हुए व्यक्ति या बच्चों के मिलने की घोषणा भी यहीं से कराई जाती है। इस स्थान की पहचान इतनी मजबूत है कि प्रदर्शनी में आने वाला लगभग हर व्यक्ति कम से कम एक बार यहां अवश्य पहुंचता है और इसे दिशा–बिंदु के रूप में भी उपयोग किया जाता है।

प्रदर्शनी में लगे रेडियो और लाउडस्पीकर पूरे परिसर में निरंतर संचालन करते हैं, जिनके माध्यम से भक्तिभाव एवं फिल्मी गीत, कार्यक्रमों की सूचनाएं तथा खोने–पाने से संबंधित घोषणाएं पूरे 24 घंटे प्रसारित की जाती हैं। यह व्यवस्था प्रदर्शनी को व्यवस्थित रूप से संचालित करने में बड़ी सहायक सिद्ध होती है। विभिन्न कार्यक्रमों की घोषणा के कारण दर्शकों को समय और स्थान की पूर्ण जानकारी मिलती है और आयोजन सुचारू रूप से चलता रहता है।

वर्ष 2006 में इटावा में पहली बार गर्मियों की प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस आयोजन की पहल खेल तमाशा आयोजक टीपू यादव द्वारा की गई थी। गर्मी की छुट्टियों में बच्चों के लिए मनोरंजन के अवसर बढ़ाने के उद्देश्य से यह प्रदर्शनी शुरू की गई, जिसमें अधिक भीड़ रात 8 बजे के बाद दिखाई देती है। हालांकि यह सर्दियों में लगने वाली प्रदर्शनी की तुलना में छोटे स्तर की मानी जाती है, लेकिन बच्चों और युवाओं में यह निरंतर लोकप्रिय बनी हुई है।

जनपद प्रदर्शनी के अंतर्गत लगाई जाने वाली ‘विकास प्रदर्शनी’ का उद्देश्य स्थानीय प्रतिभाओं, विभिन्न सरकारी योजनाओं, तकनीकी नवाचारों और शिल्प एवं उद्योग से संबंधित कार्यों को एक मंच पर प्रदर्शित करना है। इसमें इटावा जनपद और आसपास के जिलों के लोग भाग लेते हैं और अपने उत्पाद, शोध या प्रोजेक्ट प्रस्तुत करते हैं। समापन के समय प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र, प्रशस्ति–पत्र और पुरस्कार देकर प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे स्थानीय स्तर पर कौशल एवं विकास को बढ़ावा मिलता है।

प्रदर्शनी के पंडाल में हर वर्ष विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें बच्चों, युवाओं, महिलाओं और पुरुषों की प्रस्तुतियां शामिल रहती हैं। साथ ही अखिल भारतीय कवि सम्मेलन, मुशायरा, संगीत संध्या और नृत्य प्रस्तुतियां भी इस आयोजन की प्रमुख विशेषता मानी जाती हैं। इन कार्यक्रमों में प्रसिद्ध कलाकार भाग लेते हैं, जिससे प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में दर्शक आकर्षित होते हैं। यह कार्यक्रम प्रदर्शनी की सबसे ज्यादा लोकप्रिय गतिविधियों में से एक हैं।

प्रदर्शनी में खेलों की भी विशेष भूमिका रहती है। हर वर्ष दंगल, कुश्ती, हॉकी और अन्य पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाता है, जिन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। इन खेल आयोजनों में क्षेत्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी भी भाग लेते हैं। इससे न केवल खेल भावना को बढ़ावा मिलता है, बल्कि युवा प्रतिभाओं को पहचान और अवसर भी प्राप्त होते हैं। यह प्रदर्शनी खेल प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण केंद्र मानी जाती है।

प्रदर्शनी के अंतर्गत धार्मिक, सैनिक, पेंशनर, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तथा अन्य सामाजिक वर्गों के सम्मेलन भी आयोजित किए जाते हैं। इन सम्मेलनों का उद्देश्य समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय लोगों को एक साझा मंच प्रदान करना है। सम्मेलन के दौरान महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा, सम्मान समारोह और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इससे प्रशासन, नागरिकों और संगठनों के बीच समन्वय को बढ़ावा मिलता है और सामाजिक सहभागिता मजबूत होती है।

पूर्व में इटावा की प्रदर्शनी मुख्य रूप से पशु मेला के रूप में प्रसिद्ध थी, जहां विभिन्न जिलों के किसान बड़े पैमाने पर पशुओं की खरीद–फरोख्त करने आते थे। यह व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र माना जाता था। समय के साथ पशु मेले के स्वरूप में परिवर्तन हुआ, और बड़े–बड़े व्यापारिक स्टॉल, घरेलू उपयोग की सामग्री, हस्तशिल्प, कपड़ा, आभूषण और तकनीकी उपकरणों की दुकानें यहां लगने लगीं। अब प्रदर्शनी स्थानीय व्यापारियों एवं उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण बाजार बन चुकी है।

मनोरंजन के लिए प्रदर्शनी में ‘मौत का कुआं’, सर्कस, जादू शो, आकाशीय झूले और अन्य रोमांचक प्रदर्शन लगाए जाते हैं, जिनमें सभी आयु वर्ग के लोग रुचि लेते हैं। ये आकर्षण प्रदर्शनी की रौनक बढ़ाते हैं और बड़ी संख्या में दर्शकों को आकर्षित करते हैं। साथ ही बच्चों के लिए विभिन्न खेल झूले, खिलौनों की दुकानें, खाने–पीने के स्टॉल और छोटे–छोटे मनोरंजन कार्यक्रम भी लगाए जाते हैं, जिससे पारिवारिक आगंतुकों की उपस्थिति पूरे समय बनी रहती है।

प्रदर्शनी की ओर आने वाले लोगों के लिए परिवहन, सुरक्षा, स्वास्थ्य और सफाई की प्रशासनिक व्यवस्था जिला प्रशासन द्वारा की जाती है। इसके आयोजन में कई विभाग संयुक्त रूप से कार्य करते हैं, जिससे यातायात नियंत्रण, भीड़ प्रबंधन और सुविधा केंद्रों का संचालन सुचारू रूप से होता है। निगरानी के लिए पुलिस और सुरक्षा कर्मियों की विशेष तैनाती की जाती है। यह सभी व्यवस्थाएं प्रदर्शनी को सुरक्षित और सुव्यवस्थित बनाने में सहायक होती हैं।

वर्तमान में प्रदर्शनी समिति के अध्यक्ष जिलाधिकारी सुभ्रांत कुमार शुक्ला हैं, जबकि अविनव रंजन श्रीवास्तव सचिव और विक्रम सिंह राघव जनरल सेक्रेटरी के रूप में कार्य कर रहे हैं। प्रदर्शनी की कार्यकारिणी समिति नियमित बैठकों के माध्यम से कार्यक्रमों की योजना, संचालन और आयोजन से संबंधित निर्णय लेती है। समिति का उद्देश्य प्रदर्शनी को आधुनिक आवश्यकताओं के अनुरूप विकसित करते हुए पारंपरिक स्वरूप को भी संरक्षित रखना है, ताकि आने वाले वर्षों में भी यह आयोजन निरंतर सफलतापूर्वक संचालित होता रहे।

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Ashish Bajpai
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