अफसरों और कर्मियों की मिलीभगत से हैंडपंप रीबोर में लाखों रुपये का खेल

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जिले में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में हैंडपंप रीबोर के नाम पर लाखों रुपये का खेल चल रहा है। अफसरों और कर्मियों की मिलीभगत से सरकारी खजाने से फर्जी खर्चा दिखाया जा रहा है। जहां एक सामान्य घर या निजी प्रतिष्ठान में सबमर्सिबल या नया हैंडपंप लगाने में अधिकतम 20 से 25 हजार रुपये का खर्च आता है, वहीं सरकारी मशीनरी से होने वाले रीबोर में यही काम 30 से 50 हजार रुपये तक का हो रहा है।

ग्रामीण क्षेत्रों में एक हैंडपंप रीबोर करने पर 30 से 35 हजार रुपये का खर्च बताया जा रहा है, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह खर्च 45 से 50 हजार रुपये तक पहुंच जाता है। सरकारी दस्तावेजों में अधिक खर्च दिखाने की वजह से भ्रष्टाचार की संभावना को बल मिलता है।

वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले की आठ ब्लॉकों की 471 ग्राम पंचायतों में कुल 925 हैंडपंप रीबोर किए गए। पंचायत विभाग के आंकड़ों के अनुसार, एक हैंडपंप रीबोर करने में 30 से 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इस हिसाब से पंचायत राज विभाग ने 2.77 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। वहीं, निजी क्षेत्र में एक सबमर्सिबल और नया हैंडपंप लगाने में मात्र 20 हजार रुपये का खर्च आता है। इस हिसाब से कुल 1.85 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। यह अंतर दर्शाता है कि सरकारी खर्चों में कितना फर्क है और यह खेल किस तरह से चल रहा है।

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