इटावा के जवानों ने बाइस ख्वाजा में 22 आक्रान्ताओ के लहू से लिखी शौर्य की गाथा

Share This

अगस्त 1192 की वह रात इटावा के लिए एक साधारण रात नहीं थी। आसमान में घने बादल छाए हुए थे और हवा में अनहोनी की आहट थी। नगरवासी अपने घरों में बैठे भयभीत थे, क्योंकि खबरें फैल चुकी थीं कि विदेशी आक्रांता मोहम्मद गौरी की विशाल सेना इटावा की ओर बढ़ रही है। इस सेना में 180 से अधिक प्रशिक्षित सैनिक थे, जिनके पास अत्याधुनिक शस्त्र और युद्ध कौशल था। उस समय यह संख्या इटावा के लिए किसी तूफान से कम नहीं थी।

इटावा के राजा सुमेर सिंह के सामने स्थिति अत्यंत विकट थी। वे अपने नगर और प्रजा की सुरक्षा को लेकर चिन्तित थे, क्योंकि उनके अधिकांश सैनिक आगरा और झांसी की सहायता के लिए पहले ही भेजे जा चुके थे। किले में केवल 25 वीर जवान शेष थे। राजा जानते थे कि यह संख्या गौरी की सेना के सामने नगण्य है, परंतु वे कायरता से हार मानने वाले नहीं थे। उन्होंने किले के प्रांगण में अपने वीरों को बुलाकर कहा – “वीरों! आज हम संख्या से छोटे हो सकते हैं, परंतु आत्मा से नहीं। यह धरती हमारी माता है, इसकी रक्षा करना ही हमारा धर्म है।”

रात्रि का समय था। चारों ओर सन्नाटा पसरा हुआ था। 25 वीर जवानों ने अपने अस्त्र-शस्त्र उठाए और किले से नुमाइश मैदान की ओर बढ़ चले। वे जानते थे कि शायद यह उनकी अंतिम रात हो, पर उनके चेहरे पर भय का नामोनिशान न था। उनके सीने गर्व और जोश से भरे हुए थे। उधर गौरी की सेना नगाड़े बजाती, मशालें जलाती नगर की ओर बढ़ रही थी। उनके आत्मविश्वास का आधार उनकी संख्या और शक्ति थी।

जैसे ही दोनों सेनाएँ आमने-सामने आईं, रणभूमि गगनभेदी नारों से गूंज उठी। इटावा के वीरों ने “जय माँ भारती” का उद्घोष किया और विदेशी सेना ने भीषण आक्रमण प्रारम्भ कर दिया। तलवारों की टकराहट से उठने वाली चिंगारियाँ मानो रात के अंधेरे को चीर रही थीं। रक्त की धाराएँ मिट्टी से मिलकर रणभूमि को लाल रंग में रंग रही थीं।

संख्या के हिसाब से यह युद्ध असमान था। 25 बनाम 180 – यह अनुपात ही बताता है कि हालात कितने कठिन थे। लेकिन वीरता का इतिहास हमेशा संख्या से नहीं लिखा जाता। इटावा के उन जवानों ने ऐसे साहस और शौर्य का प्रदर्शन किया कि गौरी की सेना हतप्रभ रह गई। हर वार में उनके संकल्प की शक्ति थी। हर प्रहार में उनकी मातृभूमि की रक्षा का जज़्बा था।

युद्ध की भीषणता में इटावा के वीर जवानों ने 22 आक्रान्ताओ को रणभूमि में ढेर कर दिया। यह किसी चमत्कार से कम न था। हर एक जवान ने अपने से कई गुना बड़े शत्रु से लोहा लिया। खून से लथपथ होते हुए भी वे हार नहीं माने। उनके पराक्रम ने गौरी की सेना को बार-बार पीछे हटने पर मजबूर कर दिया।

जब 22 आक्रान्ता रणभूमि में ढेर हो गए तो शत्रु की पंक्तियों में भय का माहौल फैल गया। 180 में से अधिकांश घायल सैनिक युद्धभूमि छोड़कर भाग निकले। जो थोड़े बहुत बचे थे, उन्होंने भी अंधेरे का लाभ उठाकर अपनी जान बचाना उचित समझा। उस रात इटावा की धरती ने देखा कि वीरता की लौ जब जलती है, तो विशाल सेना भी उसके सामने टिक नहीं पाती।

हालाँकि इटावा के वीर जवानों ने पराक्रम से शत्रु को पीछे हटाया, लेकिन यह संघर्ष अंततः गौरी की महत्वाकांक्षा को रोक नहीं सका। कुछ समय बाद अपनी सामरिक योजनाओं और भीतरी सहयोग के बल पर मोहम्मद गौरी ने इटावा पर अधिकार कर लिया। नगर पर उसकी छाया गहराई और प्रजा ने कठिन समय का सामना किया।

अपनी विजय के प्रतीक और अपने मारे गए मुस्लिम सैनिको की स्मृति में मोहम्मद गौरी ने लाइन सफारी रोड पर ‘बाइस ख्वाजा’ का निर्माण कराया। यह आज इटावा का सबसे बड़ा मुस्लिम कब्रिस्तान माना जाता है। कहा जाता है कि यहां उन्हीं 22 मुस्लिम सैनिको की कब्रें बनी हैं, जिन्हें इटावा के वीरों ने रणभूमि में मारा था। इस स्थान की मिट्टी आज भी उस इतिहास की गवाह है।

वर्ष 1192 की वह काली रात इटावा की सामूहिक चेतना में आज भी जीवित है। नगरवासी उस बलिदान को श्रद्धा से याद करते हैं। यह घटना केवल एक युद्ध की कहानी नहीं है, बल्कि यह संदेश है कि मातृभूमि की रक्षा के लिए संकल्पित वीरों की शक्ति असीम होती है। यह घटना हमें सिखाती है कि जब तक दिलों में साहस और आत्मबल है, तब तक कोई भी आक्रांता हमारी अस्मिता को कुचल नहीं सकता।

Share This
Ashish Bajpai
Ashish Bajpaihttps://etawahlive.com/
Content Writer, Call-7017070200, 9412182324, Email-cimtindia@gmail.com, बस एक क्लिक में जाने अपने इटावा को।
अपनी खबर या कोई समस्या इटावा लाइव पर निशुल्क प्रकाशित करने हेतु हमें Whatsapp - 7017070200, Email – etawah.news@gmail.com पर जरुर भेंजें।

Read more

वोट करें

हमारा इटावा

आसई में महावीर स्वामी ने चातुर्मास कि‍या था व्यातीत

छठी शाताब्‍दी ईसा पूर्वा में जब बैदि‍क धर्म  के वि‍रूद्ध धार्मिक क्रांति‍  हुई और महात्‍मा बुद्ध तथा महावीर स्‍वामी ने इसका नेतृत्‍व कि‍या तो...

शिक्षाविद

महान शिक्षाविद मदन लाल आर्य की शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायी यात्रा

महान शिक्षाविद मदन लाल आर्य की शिक्षा के क्षेत्र में प्रेरणादायी यात्रा मदन लाल जी आर्य एक बेहद शालीन व्यक्ति थे जिनका जन्म 24 दिसंबर...

राजनीतिज्ञ

सरिता भदौरिया : इटावा की आयरन लेडी और भाजपा की एक सशक्त नेता

इटावा की राजनीति में जब भी महिलाओं के योगदान की बात होती है, तो सरिता भदौरिया का नाम अग्रणी रूप से लिया जाता है।...

प्रशासनिक अधिकारी

नुमाइश से लेकर राहत कार्यों तक, इटावा के कर्मठ और जनप्रिय उपजिलाधिकारी : विक्रम सिंह राघव

विक्रम सिंह राघव उत्तर प्रदेश प्रशासनिक सेवा के उन युवा अधिकारियों में गिने जाते हैं जिन्होंने अपने ज्ञान, कार्यशैली और ईमानदारी से न केवल...

प्रमुख संस्थान

ओम नवजीवन हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेण्टर, इटावा

बच्चों की सेहत एक परिवार के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा है और इसकी देखभाल में कोई कमी नहीं होनी चाहिए। इटावा शहर में स्थित ओम...

चिकित्सक

डॉ आनंद सिंह कुशवाहा : बेहतरीन चिकित्सक, पर्यावरण के सरंक्षक और क्रिकेट प्रेमी

डॉ आनंद सिंह कुशवाहा, चिकित्सा अधीक्षक जिला पुलिस चिकित्सालय इटावा, का जन्म 6 जुलाई 1984 को हुआ। उनके पिता का नाम श्री सर्वेश कुशवाहा...

चर्चित व्यक्तिव

राजनीति, कर्मचारी आंदोलन और शिक्षा, हरि किशोर तिवारी की बहुआयामी पहचान

इंजीनियर हरि किशोर तिवारी का नाम उत्तर प्रदेश के कर्मचारी आंदोलन, राजनीति और शिक्षा जगत में एक जाना-पहचाना नाम है। उन्होंने साधारण पृष्ठभूमि से...

पत्रकार

पत्रकारिता के धुरंधर वरिष्ठ पत्रकार सुभाष त्रिपाठी की उपलब्धियों का सफर

सुभाष त्रिपाठी का जन्म उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के मोहल्ला बघा कटरा, कच्चीगड़ी में हुआ। यह स्थान उनके लिए बहुत महत्वपूर्ण है और...

टॉप आर्टिकल्स

शरद तिवारी की अनमोल सेवा, लावारिस शवों को दिलाई गरिमामयी विदाई

शरद तिवारी: एक समर्पित समाजसेवी इटावा में शरद तिवारी का नाम समाज सेवा और मानवता के प्रति उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए जाना जाता है।...

व्यवसायी

सर्वेश यादव : एक समर्पित समाजसेवी और सुरक्षा एजेंसी के प्रबंधक

सर्वेश यादव, जनपद इटावा ही नहीं पूरे प्रदेश की सबसे भरोसेमंद सिक्योरिटी एजेंसी "एस.के. ग्रुप ऑफ सिक्योरिटी सर्विस" के प्रबंधक हैं। वे एक व्यवहार...

समाजसेवी

गौरैया की चहचहाहट में जीवन खोजती एक शिक्षिका : डॉ. सुनीता यादव

डॉ॰ सुनीता यादव का जन्म 21 जून 1976 को मैनपुरी जनपद के ग्राम अण्डनी, करहल में हुआ। पिता स्वर्गीय रामनारायण यादव, जो करहल के...

पूर्व अधिकारी

प्रणता ऐश्वर्या (IAS): एक समर्पित और न्यायप्रिय प्रशासनिक अधिकारी

प्रणता ऐश्वर्या (IAS): एक समर्पित और न्यायप्रिय प्रशासनिक अधिकारी प्रणता ऐश्वर्या 2019 बैच की आईएएस अधिकारी हैं, और इटावा में मुख्य विकास अधिकारी के पद...