नई दिल्ली। विश्व के सबसे बड़े प्रशासनिक और सांख्यिकीय अभियान जनगणना-2027 की आज औपचारिक शुरुआत हो गई। भारत सरकार ने इसके प्रथम चरण ‘मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना (HLO)’ की शुरुआत करते हुए देशव्यापी प्रक्रिया का शुभारंभ किया। यह भारत की पहली ऐसी जनगणना है, जो पूरी तरह डिजिटल डेटा कैप्चर और स्व-गणना सुविधा के साथ आयोजित की जा रही है।
देश की प्रथम नागरिक द्रौपदी मुर्मू ने स्व-गणना विकल्प के माध्यम से इस राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की, जिससे जनगणना शुरू करने की परंपरा को आगे बढ़ाया गया। वहीं अमित शाह ने भी पोर्टल के माध्यम से स्व-गणना कर जनभागीदारी का संदेश दिया।

प्रारंभिक चरण में आज से 8 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों—अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, गोवा, कर्नाटक, लक्षद्वीप, मिजोरम, ओडिशा, सिक्किम और दिल्ली के एनडीएमसी व दिल्ली छावनी क्षेत्र—में स्व-गणना प्रक्रिया शुरू की गई है। पहले ही दिन लगभग 55,000 परिवारों ने इस सुविधा का लाभ उठाया।
सरकार के अनुसार, स्व-गणना एक सुरक्षित वेब-आधारित सुविधा है, जो 16 क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें नागरिक अपने मोबाइल नंबर और आवश्यक विवरण के साथ se.census.gov.in पोर्टल पर लॉगिन कर अपने परिवार की जानकारी दर्ज कर सकते हैं। सफलतापूर्वक फॉर्म भरने पर एक यूनिक सेल्फ-एनुमरेशन आईडी (SE ID) जारी होती है, जिसे बाद में प्रगणक के सत्यापन के दौरान उपयोग किया जाएगा।

मकानसूचीकरण चरण के तहत आवास की स्थिति, घरेलू सुविधाओं और परिसंपत्तियों से जुड़े 33 महत्वपूर्ण प्रश्नों के आधार पर डेटा संग्रह किया जाएगा। यह आंकड़े भविष्य की नीतियों, योजनाओं और कल्याणकारी कार्यक्रमों के निर्माण में अहम भूमिका निभाएंगे।
यह चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर 2026 तक देशभर में संचालित होगा। प्रत्येक राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में 30 दिनों की निर्धारित अवधि में यह कार्य पूरा किया जाएगा, जबकि पहली बार घर-घर सर्वेक्षण से पहले 15 दिन का अतिरिक्त समय स्व-गणना के लिए दिया गया है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत एकत्र किए गए सभी आंकड़े पूरी तरह गोपनीय रहेंगे। जनगणना 2027 के लिए उपयोग किए जा रहे डिजिटल प्लेटफॉर्म में उच्च स्तरीय एन्क्रिप्शन और बहु-स्तरीय प्रमाणीकरण जैसी सुरक्षा व्यवस्थाएं शामिल हैं।
सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे स्व-गणना या प्रगणकों के माध्यम से इस प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी करें, ताकि देश के विकास के लिए सटीक और विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकें।
