उत्तर प्रदेश के इटावा जिले के नामचीन पर्यावरणविद् डॉ.राजीव चौहान नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस की परेड के आमंत्रित अतिथि होगे ।
गणतंत्र दिवस परेड में अतिथि के रूप में शामिल होने की सूचना मिलने के बाद डॉ.राजीव चौहान के करीबियों में हर्ष की लहर दौड़ गई है, सैकड़ो लोगों ने उन्हें बधाई संदेश दिए है। उनके करीबी ऐसा मानते है कि बेशक यह व्यक्तिगत उपलब्धि डॉ.राजीव चौहान की हो लेकिन वास्तव में इटावा के लिए यह हर्ष का ही विषय माना जाएगा।
इटावा के इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी आमजन को गणतंत्र दिवस परेड के लिए अतिथि के रूप में शामिल किया गया है।
उत्तर प्रदेश राज्य से साल 2025 को होने जा रहे गणतंत्र दिवस समारोह में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन,जल शक्ति मंत्रालय भारत सरकार द्वारा उत्तर प्रदेश के सात जल योद्धाओं को अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है इनमें इटावा के डॉ.राजीव चौहान भी शामिल है।
बताते चले कि राजीव चौहान ने जनता कॉलेज बकेवर से वर्ष 1995 में प्राणि विज्ञान में स्नातकोत्तर उपाधि प्राप्त करने के पश्चात उन्होंने यमुना, चंबल, सिंध, क्वारी और पहुज नामक पांच नदियों में जल गुणवत्ता और जलचरों की जनसंख्या पर शोध की ओर रुख किया। उन्होंने वर्ष 2005 में कानपुर विश्वविद्यालय से पीएचडी उपाधि प्राप्त की। इस दौरान मीठे पानी के कछुओं और डॉल्फिनों के अवैध शिकार को देखते हुए वर्ष 1999 में पर्यावरणीय संस्था
सोसायटी फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर का गठन किया और वन्यजीवों के अवैध व्यापार की रोकथाम और संरक्षण के लिए काम करना शुरू किया। इसके साथ ही समुदाय को संरक्षण के लिए प्रेरित करने के लिए जन जागरूकता अभियान चलाया। यह जागरूकता अभियान रंग लाया और अब तक डॉ.चौहान ने लगभग 30,000 मीठे पानी के कछुए, 10 घड़ियाल, 10 मगरमच्छ और 800 सांपों को बचा चुके है और यह सिलसिला लगातार जारी है।
वर्ष 2002 में इटावा-मैनपुरी जिलों की आर्द्रभूमि को सुखाकर समाप्त करने के लिए विश्व बैंक की परियोजना सोडिक लैंड रिक्लेमेशन लागू होने पर परियोजना का विरोध किया। इसके लिए उन्होंने आर्द्रभूमि को समाप्त न करने के लिए जागरूकता अभियान चलाया, हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और परियोजना अधिकारियों को आर्द्रभूमि क्षेत्र में काम न करने के लिए मजबूर किया। वर्ष 2006 में वेटलैंड इंस्टीट्यूट स्टोन हार्बर अमेरिका से कछुआ संरक्षण के लिए एशियाई छात्रवृत्ति प्राप्त की, वहां छह महीने का प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने कछुओं के संरक्षण के लिए अमेरिका के विभिन्न शिक्षण संस्थानों का दौरा किया। सामुदायिक सहभागिता परियोजनाओं “किड्स फॉर क्रेन्स एंड सारस मित्र” के माध्यम से सरसई नावर आर्द्रभूमि के संरक्षण की पहल करने वाले राजीव ने कहा कि सरसई नावर झील राज्य पक्षी सारस क्रेन और उनके घोंसले के लिए प्रसिद्ध है, उन्होंने राज्य सरकार को इस आर्द्रभूमि को संरक्षित करने और पक्षी व्याख्या केंद्र स्थापित करने के लिए मजबूर किया। इसके साथ ही वर्ष 2019 में उन्होंने समन पक्षी विहार और सरसई नावर को रामसर साइट घोषित करवाने में पहल की।
राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में वर्ष 2007 में 112 घड़ियालों की मौत के दौरान विश्व में मगरमच्छों के संरक्षण के लिए काम करने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था IUCN (अंतरराष्ट्रीय प्रकृति एवं प्रकृति संरक्षण संघ) से संपर्क कर घड़ियालों को बचाने में मदद की। राष्ट्रीय चंबल अभ्यारण्य में घड़ियालों के संरक्षण के लिए जनसहभागिता से घड़ियालों के संरक्षण के लिए मड ऑन बूट्स कार्यक्रम के तहत सेंचुरी नेचर फाउंडेशन द्वारा वर्ष 2017 में छात्रवृत्ति प्रदान की गई।
संकटग्रस्त प्रजातियों के संरक्षण में उनके योगदान को देखते हुए उन्हें वर्ष 2006 में आईयूसीएन के मीठे जल के कछुए एवं स्थलीय कछुआ समूह तथा वर्ष 2013 में मगरमच्छ विशेषज्ञ समूह की मानद सदस्यता प्रदान की गई। इसी को ध्यान में रखते हुए उन्हें वर्ष 2015 में उत्तर प्रदेश राज्य वन्यजीव बोर्ड का सदस्य मनोनीत किया गया तथा वर्ष 2013 से इटावा सफारी पार्क सोसायटी की कार्यकारिणी के सदस्य बने। सामुदायिक सहभागिता के आधार पर राजीव आगरा के बटेश्वर से इटावा के डिभौली घाट तक 100 किलोमीटर क्षेत्र में यमुना नदी के मीठे जल के कछुओं का संरक्षण कर रहे हैं। वन्यजीवों के संरक्षण के लिए उन्हें प्रदेश के राज्यपाल, मुख्यमंत्री एवं वन मंत्री द्वारा सम्मानित किया जा चुका है। उनके 20 शोध पत्र राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। वर्ष 2017-20 में भारतीय वन्यजीव संस्थान की नमामि गंगे परियोजना के अंतर्गत जैव विविधता संरक्षण एवं गंगा पुनरुद्धार परियोजना में संरक्षण अधिकारी के पद पर कार्य किया। वर्तमान में वह अपनी नमो कालिंदी परियोजना के तहत यमुना नदी की जैव विविधता संरक्षण पर काम कर रहे हैं।
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