संभावित कम वर्षा एवं सूखे की स्थिति से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए सोमवार को अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में जल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन तथा सूखा प्रबंधन की तैयारियों की समीक्षा की गई।

बैठक में अधिकारियों को जल संरक्षण के लिए जनपद स्तर पर सघन अभियान चलाने के निर्देश दिए गए। साथ ही सूख चुके तालाबों में नहरों एवं नदियों से पानी भरने की कार्ययोजना तैयार करने पर जोर दिया गया, ताकि वर्षा की कमी की स्थिति में जल संकट से बचा जा सके।
अधिकारियों ने सोलर ट्यूबवेल और रेन वाटर हार्वेस्टिंग को बढ़ावा देने, खराब हैंडपंपों एवं जल जीवन मिशन के अंतर्गत स्थापित टोंटियों की मरम्मत कराने तथा तालाबों की सफाई एवं जल स्रोतों के संरक्षण के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए।
बैठक में भूजल स्तर को बढ़ाने के लिए रिचार्ज पिट और चेक डैम निर्माण कार्यों को प्राथमिकता देने पर भी बल दिया गया। इसके अलावा किसानों को कम जल खपत वाली फसलों की खेती के लिए प्रेरित करने की रणनीति पर चर्चा की गई, जिससे जल संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि जल संरक्षण एवं सूखा प्रबंधन से संबंधित सभी कार्यों की प्रत्येक 15 दिन में समीक्षा की जाएगी, ताकि योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके।
बैठक के अंत में सभी विभागों से समन्वित प्रयास करने का आह्वान करते हुए “जल है तो कल है” के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने और जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने का संकल्प लिया गया।
