पुराना शहर चौराहा स्थित नगर के प्रसिद्ध वृंदावन धाम श्री राधावल्लभ मंदिर में इस वर्ष वसंतोत्सव का पावन पर्व सोमवार को श्रद्धाभाव और परंपरागत ढंग से मनाया गया। इस शुभ अवसर पर श्री राधावल्लभ लाल जी महाराज और श्री राधारानी का बासंती पोशाक धारण कराकर मनमोहक श्रृंगार किया गया। ठाकुर जी को 51 किलो बेसन के लड्डुओं का भोग अर्पित किया गया।
श्री धाम वृंदावन की परंपरा के अनुसार मंदिर में बसंतोत्सव के साथ ही होली उत्सव का भी शुभारंभ हो गया। भक्तों ने ठाकुर जी पर अबीर-गुलाल उड़ाकर उल्लासपूर्वक पर्व का आनंद लिया। इस अवसर पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिन्होंने अपने इष्ट देव के दर्शन कर बासंती श्रृंगार को अपलक निहारा।
मंदिर के चरण सेवक गोपाल प्रकाश चंद्र गोस्वामी ने ठाकुर जी को बासंती पोशाक धारण कराकर विशेष श्रृंगार किया। पूजा-अर्चना के उपरांत सुबह 9:00 बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के दर्शन हेतु खोल दिए गए। श्री राधावल्लभ लाल जी महाराज, श्री राधारानी और श्री लाल जू को रंग-बिरंगे फूलों और आभूषणों से सजाया गया, जिससे उनका आकर्षक रूप भक्तों को मंत्रमुग्ध कर गया।
सायंकाल मंदिर में भजन-कीर्तन का आयोजन हुआ जिसमें भक्तों ने भक्ति रस में सराबोर होकर श्री राधा-कृष्ण के भजनों का आनंद लिया। ब्रज की परंपरा अनुसार इस दिन से होली उत्सव की शुरुआत हो गई और मंदिर परिसर में चारों ओर बसंती बयार बहने लगी। सभी भक्तों को प्रसाद वितरित किया गया।
बसंत पंचमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए गोपाल प्रकाश चंद्र गोस्वामी ने बताया कि यह पर्व ऋतुराज वसंत के स्वागत में मनाया जाता है। यह प्रकृति का पर्व है, जिसमें पीले वस्त्र पहनने, पीले चावल खाने और ललाट पर पीला चंदन लगाने की परंपरा है। बसंत पंचमी के दिन से मौसम में परिवर्तन आता है और पेड़-पौधों में नवीन उल्लास छा जाता है।
