भरथना (रिपोर्ट- तनुज श्रीवास्तव, 9720063658)- ‘‘बेटी न होगी तो व्यवहार न होगा, बेटी न होगी तो त्यौहार न होगा‘‘ भू्रण हत्या जैसी कुरीति को विलुप्त करने व नारी शक्ति के अभिनन्दन को समर्पित पंक्तियां सुन साहित्यप्रेमियों की आँखें नम हो गयीं। साथ ही वीर, श्रृंगार व हास्य की रचनायें सुन देर रात्रि तक काव्यप्रेमियों ने साहित्यिक यात्रा की।
शनिवार की शाम कस्बा के बकेवर रोड स्थित ऊँ श्री पागलबाबा गंगासागर धाम मोढी पर स्थापित नौ मंजिला श्री पागल बाबा मन्दिर शिखर पूजन एवं पंचतत्व हरिहर महायज्ञ के उपलक्ष्य में अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। जिसका शुभारम्भ समस्त कवियों ने कार्यक्रम संयोजक व मुख्य न्यासी श्याम सुन्दर चौरसिया की उपस्थिति में भगवान श्री राधाकृष्ण की प्रतिमा पर तिलक वन्दन व दीप प्रज्जवलित करके किया। तदुपरान्त कवियों के स्वागत सम्मान के साथ कवि सम्मेलन को गति प्रदान की गई। कवियत्री सुमित्रा सरल ने ज्ञान की देवी का आवाहन करने के उपरान्त श्रृंगार से ओतप्रोत अपनी रचना ‘‘मैं तुमसे मिल के जाती हूँ तो ये आंसू नहीं रूकते‘‘ पढकर खूब तालियां बटोरीं। वहीं राजू चौरसिया ने ‘‘बेटी न होगी तो व्यवहार न होगा, बेटी न होगी तो त्यौहार न होगा‘‘ पढकर समाज में फैली भू्रण हत्या जैसी कुरीति को पूर्णतया विलुप्त करने पर बल देकर नारी शक्ति के प्रति वन्दन किया। साथ ही अशोक नागर ने ‘‘वो सनातनी में तनातनी का खेल नहीं चलने देगा‘‘, ‘‘दो गज जमीन न छोडी गौमाता के लिए‘‘ पढकर वर्तमान में गौमाता की दुर्दशा पर चिन्तन व्यक्त किया तथा मुकेश शांडिल्य ने हास्य व्यंग ‘‘सम्बन्धों को यार निभाना पडता है, बीबी के भी पाँव दबाना पडता है‘‘ पढकर लोगों को खूब गुदगुदाया। अभिषेक अरजरिया ने ‘‘हिन्दुस्तान मत बेंचो‘‘ व वीरेन्द्र विद्रोही ने ‘‘कैसे पलेगें बच्चे अगर खेतियां न हों‘‘ पढकर अन्नदाताओं की चिन्ता की लकीरों को प्रस्तुत किया। साथ ही नीलम राठौर, हरनाथ सिंह चौहान आदि ने भी अपनी रचनाओं के माध्यम से महिला-पुरूष साहित्यप्रेमियों को काव्य यात्रा करवायी। इस मौके पर पूर्व चैयरमैन मनोज पोरवाल, पूर्व जि0पं0स0 मनोज यादव बण्टी, अरविन्द चौरसिया, गुड्डू चौरसिया, आशू चौरसिया, आशू शुक्ला, राजू माहेश्वरी, सचिन कौशल, आर0एन0 दुबे सहित कई गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति उल्लेखनीय रही।
