बीती रात आई आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश ने ताखा तहसील के सबसे बड़े कस्बे ऊसराहार में प्रशासनिक तैयारियों की पोल खोलकर रख दी। नालियों के चोक होने से कस्बे में भारी जलभराव हो गया और सड़क किनारे स्थित 100 से अधिक घरों एवं दुकानों में पानी घुस गया। अचानक हुए जलभराव से व्यापारियों और स्थानीय लोगों को लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।

स्थानीय लोगों के अनुसार कस्बे की अधिकांश नालियां वर्षों से साफ नहीं कराई गई हैं। नालियों में जमा कचरे और गाद के कारण बारिश का पानी निकासी न होने से सड़कों पर भर गया और घरों व दुकानों में घुस गया। हालात इतने खराब थे कि पूरी रात लोग घरों और प्रतिष्ठानों से पानी निकालने में जुटे रहे।
कस्बावासियों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान सड़क का स्तर ऊंचा कर दिया गया, जबकि सड़क किनारे स्थित मकान और दुकानें अपेक्षाकृत नीचे रह गईं। ऐसे में बारिश का पानी सीधे घरों और दुकानों की ओर बहने लगा। नालियां चोक होने के कारण जल निकासी पूरी तरह बाधित हो गई।
बारिश से कई व्यापारियों को भारी नुकसान हुआ। व्यवसायी लक्ष्मीकांत गुप्ता की खाद की दुकान और गोदाम में पानी भर जाने से बड़ी मात्रा में खाद की बोरियां खराब हो गईं। वहीं सुशील गुप्ता के निर्माणाधीन भवन के बेसमेंट में नाली का पानी भर जाने से बेसमेंट करीब चार फीट तक जलमग्न हो गया। इसके अलावा रामबाबू गुप्ता, सत्यप्रकाश गुप्ता, रविंद्र गुप्ता, अवनीश मिश्रा, भगवान दास गुप्ता, नरेंद्र गुप्ता, विनोद गुप्ता, प्रदीप गुप्ता, सुरेश गुप्ता, सदानंद गुप्ता और सुनील गुप्ता सहित अनेक दुकानदारों को भी नुकसान झेलना पड़ा।
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि मानसून से पूर्व नालियों की सफाई के लिए प्रशासनिक स्तर पर निर्देश जारी किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर उनका पालन नहीं होता। कस्बावासियों का कहना है कि पिछले लगभग एक दशक से हर वर्ष बारिश के दौरान इसी प्रकार की समस्या उत्पन्न होती है, लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
घटना को लेकर व्यापार मंडल एवं किसान संगठनों में भी आक्रोश व्याप्त है। व्यापार मंडल अध्यक्ष रवी चक्रवर्ती, अनिल कौशल तथा भारतीय किसान संगठन के जिला अध्यक्ष नरेंद्र गुप्ता ने जिलाधिकारी से तत्काल मामले का संज्ञान लेने और बंद पड़ी नालियों की युद्धस्तर पर सफाई कराने की मांग की है।
संगठन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल निकासी की समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया और नालियों की सफाई शीघ्र नहीं कराई गई तो व्यापार मंडल एवं किसान संगठन संयुक्त रूप से आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।
