डॉ भीमराव अंबेडकर कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज, इटावा के कल्पना चावला गर्ल्स हॉस्टल के बाहर उस समय हड़कंप मच गया, जब छात्राओं ने नाली में लगभग 8 से 10 फीट लंबे अजगर को देखा। विशाल सर्प को देखते ही हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं में दहशत फैल गई और अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही कॉलेज के अधिष्ठाता और हॉस्टल वार्डन मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद कॉलेज में स्थापित वन्यजीव रेस्क्यू हेल्पडेस्क के प्रभारी एवं सर्प विशेषज्ञ डॉ आशीष त्रिपाठी को तत्काल बुलाया गया। सूचना मिलते ही डॉ त्रिपाठी मौके पर पहुंचे और कड़ी मशक्कत के बाद अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। इसके बाद छात्राओं और स्टाफ ने राहत की सांस ली।
सर्पदंश विशेषज्ञ डॉ आशीष त्रिपाठी ने बताया कि यह अजगर पायथन मोलुरस प्रजाति का विषहीन सर्प है, जिसमें विष ग्रंथि नहीं होती है। हालांकि, इसके काटने से त्वचा में गंभीर संक्रमण होने की संभावना रहती है। उन्होंने बताया कि इस अजगर को वन विभाग के दिशा-निर्देशन में सुरक्षित वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया है। साथ ही उन्होंने बताया कि यह प्रजाति वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित है, इसलिए इसे नुकसान पहुंचाना दंडनीय अपराध है।
हॉस्टल में रहने वाली बीटेक छात्रा कैफ़ी ने बताया कि इतने बड़े अजगर को पहली बार देखकर सभी छात्राएं बेहद डर गई थीं। उन्होंने कहा कि रेस्क्यू के बाद अब सभी खुद को सुरक्षित महसूस कर रही हैं।
कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ देवेंद्र सिंह ने बताया कि कॉलेज परिसर में संस्था ‘ओशन’ द्वारा स्थापित वन्यजीव रेस्क्यू हेल्पडेस्क के माध्यम से इस अजगर का सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। उन्होंने कहा कि अब हॉस्टल की सभी छात्राएं, स्टाफ और अजगर सुरक्षित हैं।
इस दौरान हॉस्टल वार्डन डॉ के.के. पटेल सहित अन्य कर्मचारी भी मौके पर मौजूद रहे।
