जिलाधिकारी शुभ्रान्त कुमार शुक्ल ने जनपदवासियों को अवगत कराते हुए बताया कि शासनादेश संख्या 01/2019/33/एक-2-2019-19 (रिट)/2019 राजस्व अनुभाग-2, लखनऊ दिनांक 10 जनवरी 2019 तथा उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम 1948 में निहित प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक वर्ष 1 जून से 31 अगस्त तक का समय मछलियों का प्रजनन काल माना जाता है। इस अवधि में नदियों एवं बहती जलधाराओं में मछलियां प्राकृतिक रूप से प्रजनन करती हैं।

जिलाधिकारी ने बताया कि मछलियों के संरक्षण एवं संवर्धन के उद्देश्य से इस अवधि में मत्स्य आखेट (मछली पकड़ना), शिकारमाही, मत्स्य बीज एवं फिंगरलिंग को पकड़ने, नष्ट करने तथा बेचने पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया है। प्रजनन काल के दौरान मछलियों का शिकार करना कानूनन दंडनीय अपराध है।
उन्होंने कहा कि शासनादेश के अनुपालन में जनपद इटावा की सीमा क्षेत्र के अंतर्गत बहने वाली सभी नदियों एवं जलधाराओं में 1 जून 2026 से 31 अगस्त 2026 तक मछली पकड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में किसी भी व्यक्ति द्वारा मछली का आखेट या संबंधित प्रतिबंधित गतिविधियां किए जाने पर उत्तर प्रदेश मत्स्य अधिनियम 1948 के तहत नियमानुसार दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही आमजन से भी अपील की गई है कि वे मछलियों के संरक्षण एवं पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहयोग करें तथा प्रतिबंध अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की अवैध मत्स्य गतिविधि से दूर रहें।
