सामाजिक न्याय, स्वतंत्रता और बराबरी की बड़ी-बड़ी बातें करने वाले लोग आखिर कब देश की सबसे देशभक्त बिरादरी यानी शराबी समाज के साथ बराबरी का व्यवहार करेंगे? यह सवाल आज इटावा की गलियों में गूंजता रहा। क्योंकि सुरा स्वराज पार्टी (रजि. नहीं) के स्वघोषित राष्ट्रीय अध्यक्ष दिलदार भाई ने इस “अमानवीय व्यवहार” के खिलाफ लंबी लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

दिलदार भाई ने इटावा लाइव से विशेष बातचीत में बताया कि जब पूरा देश कोरोना काल में आर्थिक संकट से जूझ रहा था, तब एक वही समाज था जो सामाजिक दूरी की धज्जियां नहीं, बल्कि लाइन की मर्यादा निभाते हुए सरकारी दुकानों के बाहर खड़ा था। घंटों की प्रतीक्षा, पसीने से तरबतर चेहरे, और जेब से सीधे राजस्व विभाग तक जाती देशभक्ति — यह योगदान इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाना चाहिए।

उन्होंने गर्व से कहा कि “देश की एकोनॉमी को अगर किसी ने वेंटिलेटर से हटाकर खड़ा किया तो वह हमारे त्यागी साथियों ने। जब उद्योग बंद थे, तब ठेका खुला था; जब ऑफिस बंद थे, तब देशभक्ति चालू थी।” उनका मानना है कि इतनी टैक्स देने वाली बिरादरी को समाज में जो अपमान झेलना पड़ रहा है, अब उस पर मौन रहना देशद्रोह जैसा लगेगा।

आज अध्यक्ष दिलदार भाई ने शुभ्रांत कुमार शुक्ल, जिलाधिकारी इटावा, को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन सौंपते समय उनकी आंखों में आंसू और हाथ में हल्की कंपन थी, जिसका कारण भावनाएं थीं या पिछली रात की बैठक यह स्पष्ट नहीं हो पाया। जिलाधिकारी महोदय ने अपने उद्बोधन में गंभीरता से स्वीकार किया कि “यह सत्य है कि शराबी समाज से सरकार को अत्यंत महत्वपूर्ण राजस्व प्राप्त होता है।” साथ ही उन्होंने यह भी जोड़ा कि “आपका मांगपत्र पढ़ने में थोड़ी कठिनाई हो रही है, कृपया इसे तसल्ली से दोबारा लिखकर लाएं।” इस पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने आश्वासन दिया कि अगली बार लिखावट के साथ शब्द भी सीधे होंगे।

इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने ब्रजेश कुमार श्रीवास्तव, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से मुलाकात की। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस होली पर पुलिस शराबी भाइयों से “बहुत ही प्यार से पेश” आएगी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि अगर सुरा स्वराज पार्टी (रजि. नहीं) का कोई सदस्य होली की खुशी में हद पार करता है, तो उसे कानून भी बराबरी से गले लगाएगा।

मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम ने ज्ञापन पर नजर डालते हुए कहा कि “आपकी मांगें विकास कार्यों से संबंधित नहीं लगतीं।” मौखिक बातचीत में उन्होंने शराबी समाज की तर्कशक्ति की सराहना जरूर की, लेकिन फाइल आगे बढ़ाने में अपनी असमर्थता जता दी।

वहीं अपर जिलाधिकारी अभिनव रंजन श्रीवास्तव ने इस पूरे प्रकरण पर कुछ भी कहने से दृढ़ता के साथ इंकार कर दिया। पत्रकारों ने जब सुरा स्वराज पार्टी (रजि. नहीं) की मांगों पर उनका पक्ष जानना चाहा, तो उन्होंने इतना ही कहा कि “प्रशासन आपके बलिदान से भलीभांति अवगत है। हालांकि उनके इस संयमित मौन को पार्टी कार्यकर्ताओं ने “मौन समर्थन” करार दिया।

दिलदार भाई का आरोप है कि देश की आधी आबादी यानी महिलाएं सुरा स्वराज पार्टी (रजि. नहीं) के प्रति अत्यधिक कठोर रुख रखती हैं। उन्होंने कहा, “हमें समझाया नहीं जाता, सीधे समझ लिया जाता है।” हालांकि इस विषय पर उन्होंने ज्यादा बोलने से परहेज किया, क्योंकि घर की शांति राष्ट्रीय शांति से कम महत्वपूर्ण नहीं होती।
पार्टी की मुख्य मांगों में “शराबी सम्मान दिवस”, “लाइन में खड़े होने की देशभक्ति पदक योजना” और “घर देर से आने पर मानवीय व्यवहार अधिनियम” शामिल हैं। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब किसान, मजदूर और कर्मचारी दिवस हो सकता है, तो शराबी दिवस क्यों नहीं?
दिलदार भाई ने यह भी दावा किया कि शराबी समाज सबसे बफादार होता है — “ब्रांड बदल सकता है, पर दोस्ती नहीं।” उन्होंने बताया कि त्याग, धैर्य और निरंतर कर-भुगतान ही उनकी पहचान है। शहर में इस घोषणा के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग इसे व्यंग्य मान रहे हैं, तो कुछ इसे “राजस्व क्रांति” की शुरुआत बता रहे हैं।
अंत में दिलदार भाई ने कहा, “हम बराबरी नहीं, बस थोड़ी नरमी चाहते हैं। अगर सामाजिक न्याय सबके लिए है, तो हमारे लिए भी होना चाहिए। हम देश के वफादार टैक्सपेयर्स हैं, बस हमारा चाल ढाल थोड़ा टेढ़ा है।” अब देखना यह है कि सुरा स्वराज पार्टी (रजि. नहीं) की यह लंबी लड़ाई समाज में नई समझ पैदा करेगी या अगली बैठक तक सीमित रह जाएगी। फिलहाल इटावा की फिजाओं में एक नारा जरूर गूंज रहा है — “देशभक्ति में जोश है, हाथ में खाली ग्लास है!”
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