यादगार पलों को सहेजने वाले फोटोग्राफर खुद बेबस क्यों?

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इटावा: पिछले दो दशकों में इटावा में फोटोग्राफी स्टूडियो की संख्या में भारी गिरावट देखी गई है। आधुनिक तकनीकों और बदलते समय के साथ, फोटोग्राफरों के सामने कई चुनौतियां आ खड़ी हुई हैं। आज फोटोग्राफर्स केवल शादियों और अन्य आयोजनों के दौरान ही सक्रिय रहते हैं, लेकिन ऑफ-सीजन में उन्हें बेरोजगारी का सामना करना पड़ता है।

जिला प्रभारी  ब्रजमोहन चौधरी का कहना है कि पूरी मेहनत और रातभर जागने के बावजूद फोटोग्राफरों के जीवन स्तर में कोई विशेष सुधार नहीं हो पा रहा है। उन्होंने यह भी बताया कि पहले इटावा  और आगरा जैसे शहरों में पर्यटन स्थलों पर प्री-वेडिंग शूट से अच्छा मुनाफा हो जाता था, लेकिन अब इस पर अधिक शुल्क लगा दिए जाने से सामान्य फोटोग्राफर और आम लोग अपनी यादगार तस्वीरें खिंचवाने से वंचित हो रहे हैं।

मीडिया प्रभारी विनय बाथम ने कहा कि फोटोग्राफरों की जीवन सुरक्षा की गारंटी मिलनी चाहिए। जिस तरह अन्य वर्गों के लिए सरकार कल्याणकारी योजनाएं चला रही है, उसी तरह फोटोग्राफरों के जीवन स्तर को सुधारने के लिए भी योजनाएं बनाई जानी चाहिए।

फोटोग्राफर समीर अली का कहना है कि फोटोग्राफी की लागत अब काफी बढ़ चुकी है, जिससे कई फोटोग्राफरों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। कुछ फोटोग्राफरों का जीवन संघर्षमय हो गया है, क्योंकि बढ़ते खर्चों और कम आमदनी के कारण वे अपने स्टूडियो को बनाए रखने में असमर्थ हो रहे हैं।

गौरव चौहान बताते हैं कि डिजिटल फोटोग्राफी के आने से मोबाइल फोटोग्राफी का महत्व बढ़ गया है। इसने फोटोग्राफरों की दिक्कतें और बढ़ा दी हैं, क्योंकि अब लोग महंगी कैमरा फोटोग्राफी के बजाय मोबाइल से ही फोटो लेना पसंद करते हैं। इससे पारंपरिक फोटोग्राफी का क्षेत्र प्रभावित हो रहा है।

भानु भदोरिया ने इस समस्या पर जोर देते हुए कहा कि मोबाइल से नई समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। लोग उच्च गुणवत्ता की फोटोग्राफी चाहते हैं, लेकिन इसके लिए अधिक खर्च नहीं करना चाहते। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि गेस्ट हाउस में विदाई की समय सीमा सुनिश्चित की जानी चाहिए, क्योंकि अक्सर पार्टी देर से समाप्त होती है, जिससे फोटोग्राफरों को अतिरिक्त समय तक रुकना पड़ता है।

फोटोग्राफर वीरेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार ग्राहक शादी का काम तो करवा लेते हैं, लेकिन समय पर डीवीडी और एलबम नहीं उठाते। इससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो जाता है, क्योंकि स्टूडियो में पुराना डाटा अधिक समय तक रखने से अन्य कामों में बाधा आती है।

वर्षों पुराने लवकुश स्टूडियो के संचालक राजेंद्र प्रजापति ने अपील की कि बुकिंग कराने वाले ग्राहक 90 दिनों के भीतर अपने फोटो और वीडियो का डाटा अवश्य ले लें। 90 दिनों के बाद फोटोग्राफर की कोई जिम्मेदारी नहीं होती, लेकिन कई ग्राहक महीनों बाद आकर विवाद करने लगते हैं, जिससे अनावश्यक समस्याएं उत्पन्न होती हैं।

फोटोग्राफी क्षेत्र के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए, वरिष्ठ फोटोग्राफर हरेन्द्र प्रताप सिंह ने बताया कि इटावा में फोटोग्राफी का इतिहास कम गौरवशाली नहीं रहा है। ब्रिटिश काल में भी यहां के डिप्टी कलेक्टर के साथ एक फोटोग्राफर मौजूद रहता था, जो प्रशासनिक कार्यों के लिए तस्वीरें खींचता था।

आज के समय में, फोटोग्राफरों के सामने आर्थिक, तकनीकी और सामाजिक चुनौतियां खड़ी हो गई हैं। ऐसे में सरकार और समाज को मिलकर इस कला को संजोने और फोटोग्राफरों को बेहतर भविष्य देने के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

ब्रजमोहन चौधरी , विनय बाथम, समीर अली, अरविन्द कुमार, संजू कोहली, सलमान, भानु भदोरिया, गौरव चौहान, वीरेन्द्र सिंह, चन्दन गोयल, अंकुश निगम, पिंटू कुशवाहा,शालू मिक्सिंग, बसरू, मोहित कुशवाहा, प्रमोद कुमार, हरेन्द्र प्रताप सिंह, नसीम मंसूरी, राजेंद्र प्रजापति, शानू फोटोग्राफर, नीरज दुबे  आदि लोगो ने फोटोग्राफी के भविष्य पर चिंता जताई ।

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