केके कॉलेज में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के दूसरे दिन सत्र का शुभारंभ इनवाइटेड स्पीकर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के वनस्पति विज्ञान विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. विजय मालिक ने किया। उन्होंने जैव विविधता और जलवायु परिवर्तन पर व्याख्यान देते हुए जैव विविधता के विकास के इतिहास, प्रजातियों के उद्भव और उनके संरक्षण से संबंधित तथ्यों पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि पूरे भारत में 17,643 प्रजातियां पाई जाती हैं, जबकि अकेले उत्तर प्रदेश में 1,442 प्रजातियां मौजूद हैं। उन्होंने पौध संरक्षण और पर्यावरण शुद्धता पर जागरूकता अभियान की आवश्यकता पर बल दिया।
केरल कोझिकोड से कॉलेज के पूर्व छात्र प्रो. आशीष कुमार चतुर्वेदी ने ऑनलाइन माध्यम से ‘कृषि क्षेत्र में जल प्रबंधन’ विषय पर व्याख्यान दिया। वहीं, सीनियर जीएम/विभागाध्यक्ष, पर्यावरण विभाग, भारत सरकार ने ‘जैव विविधता के प्रमाणन के लिए बुनियादी ढांचे और परियोजनाओं में परिस्थितिकीय डिजाइन कोड’ विषय पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि वर्तमान में मानव प्रकृति से प्रतिस्पर्धा कर रहा है, जिससे पर्यावरण तेजी से प्रदूषित हो रहा है।
समापन सत्र की अध्यक्षता प्राचार्य प्रो. महेंद्र सिंह ने की। इनवाइटेड स्पीकर चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय, कानपुर के डायरेक्टर (सीड्स एंड फूड्स) प्रो. विजय कुमार यादव, चौधरी चरण सिंह डिग्री कॉलेज के प्रो. राजीव कुमार विश्नोई, कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज के डीन प्रो. एन. के. शर्मा और पूर्व प्राचार्य प्रो. मौकम सिंह ने पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता पर अपने-अपने विचार व्यक्त किए।
समापन सत्र के मुख्य अतिथि सैफई पीजीआई के प्रति कुलपति प्रो. रमाकांत यादव ने आयोजन समिति और कॉलेज प्रबंधन को इस वृहद राष्ट्रीय संगोष्ठी के आयोजन के लिए साधुवाद दिया। गेस्ट ऑफ ऑनर पूर्व क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी कानपुर मंडल, प्रो. रिपुदमन सिंह ने कहा कि मानव को पर्यावरण से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय उसे मित्र बनाना चाहिए। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में कॉलेज प्रबंध समिति के मंत्री ओंकारनाथ वर्मा उपस्थित रहे। इस अवसर पर बेस्ट ओरल और बेस्ट पोस्टर शोध पत्र प्रस्तुत करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। संगोष्ठी के संयोजक प्रो. राजवीर सिंह और सह-संयोजक डॉ. सुशील कुमार सहित बड़ी संख्या में शिक्षक, छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
