बाल संरक्षण अधिकारी सोहन गुप्ता ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया। यह प्रशिक्षण जसवंतनगर थाना व बलरई थाना में आयोजित किया गया, जिसमें पुलिसकर्मियों को बच्चों के अधिकार और उनके संरक्षण से संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं की जानकारी दी गई।

प्रशिक्षण के दौरान सोहन गुप्ता ने बताया कि देखरेख व संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए न्यायपीठ बाल कल्याण समिति कार्य करती है, जबकि अपराध में संलिप्त बच्चों के लिए जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड की भूमिका होती है। उन्होंने पुलिसकर्मियों को निर्देश दिया कि बच्चों को पेश करते समय वर्दी न पहनें, बल्कि सामान्य पोशाक में ही जाएं, ताकि बच्चे मानसिक दबाव महसूस न करें। साथ ही, थाने में बच्चों को उचित स्थान पर बिठाने और मामूली अपराधों में सिर्फ जीडी इंट्री कर मेडिकल चेकअप कराने के बाद उन्हें निर्धारित समय पर पेश करने की प्रक्रिया को अपनाने के निर्देश दिए। उन्होंने पुलिसकर्मियों को संबंधित प्रारूपों को भरने का तरीका भी सिखाया।

लावारिस मिले शिशुओं के संबंध में जानकारी देते हुए सोहन गुप्ता ने बताया कि शून्य से दो वर्ष तक के बच्चों को 60 दिनों तक ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से, अन्य जनपदों को सूचित कर एवं अखबार में प्रकाशन कराकर जैविक माता-पिता की खोज की जाती है। यदि माता-पिता का पता नहीं चलता है, तो बच्चे को दत्तक ग्रहण के लिए स्वतंत्र घोषित कर दिया जाता है।
इस अवसर पर चाइल्ड हेल्पलाइन की जिला समन्वयक कीर्ति गुप्ता, बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रेम कुमार शाक्य, क्राइम इंस्पेक्टर नरेंद्र मिश्रा, सिटी इंचार्ज राजकुमार सिंह, एसआई आशीष कुमार, बलरई थाने में क्राइम इंस्पेक्टर रमेश यादव, एसआई शेर सिंह, शिवपूजन सहित महिला व पुरुष आरक्षी उपस्थित रहे।
