आशा कर्मचारी यूनियन उत्तर प्रदेश 132 ए सिविल लाइन्स, इटावा की आशा कार्यकर्ताओं ने आज जिलाधिकारी इटावा को प्रधानमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इस दौरान वे अपनी मांगों को लेकर काफी संवेदनशील दिखाई दीं और सरकार द्वारा प्रस्तुत बजट में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया।

आशा कार्यकर्ताओं ने ज्ञापन के माध्यम से अपनी समस्याओं और मांगों को उजागर किया। उन्होंने सरकार से चारों श्रम संहिताओं को रद्द करने और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए न्यूनतम वेतन 26,000 रुपये निर्धारित करने की मांग की। साथ ही मनरेगा के बजट में वृद्धि और शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कल्याणकारी योजनाओं के बजट में बढ़ोतरी की आवश्यकता पर बल दिया।

ज्ञापन में एक सर्वसमावेशी ऋण माफी एवं कर्ज मुक्ति योजना लागू करने और किसान पेंशन योजना को 10,000 रुपये प्रति माह तक बढ़ाने की मांग की गई। इसके अलावा, बिजली बिल 2022 को वापस लेने और प्रीपेड स्मार्ट मीटर योजना को रद्द करने की भी मांग की गई।

आशा कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि योगी सरकार द्वारा घरेलू उपभोक्ताओं को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने और किसानों को सिंचाई के लिए बिना शर्त फ्री बिजली देने का वादा पूरा नहीं किया गया है। उन्होंने फर्जी बिलिंग और अन्य बिजली संबंधी समस्याओं के समाधान की भी मांग की।
उन्होंने कहा कि कारपोरेट कंपनियों के लिए अंधाधुंध भूमि अधिग्रहण बंद किया जाए और भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना अधिनियम, 2013 का सख्ती से पालन किया जाए। साथ ही, जबरन भूमि अधिग्रहण और सर्किल रेट में सालाना वृद्धि की मांग भी की गई।

कृषि क्षेत्र से संबंधित मांगों में डीएपी, यूरिया जैसी खादों की आपूर्ति बढ़ाने, कालाबाजारी रोकने, नकली खाद-बीज पर कड़ी कार्रवाई करने, कृषि यंत्रों और कीटनाशकों पर से जीएसटी हटाने की मांग प्रमुख रही।
