डॉ. मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्रित्व काल में जैन समाज को 27 जनवरी 2014 को राष्ट्रीय अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया। यह कदम जैन समाज की पहचान, अधिकारों और विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल थी। यह निर्णय उनके समतावादी दृष्टिकोण और सामाजिक न्याय के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। जैन समाज ने इस पहल को उनके प्रति एक ऐतिहासिक योगदान के रूप में देखा।
भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर सहित विभिन्न उच्च पदों पर सेवाएं देने वाले प्रसिद्ध अर्थशास्त्री डॉ. मनमोहन सिंह को उनकी प्रामाणिकता और नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता के लिए जाना जाता है। जैन समाज ने उनके योगदान को मान्यता देते हुए उन्हें 2021 में प्रतिष्ठित अणुव्रत पुरस्कार से सम्मानित किया।
साहित्यकार डॉ. दिलीप धींग ने डॉ. सिंह के उस प्रेरणादायक वक्तव्य को याद किया, जो उन्होंने 27 मई 2006 को जैनविद्या संस्थान द्वारा जैन पांडुलिपि कैटलॉग के विमोचन के अवसर पर विज्ञान भवन, दिल्ली में दिया था। डॉ. मनमोहन सिंह ने जैन धर्म के तर्कसंगत सिद्धांतों की सराहना करते हुए कहा था कि इससे भारत में वैज्ञानिक सोच का विकास हुआ। जैन विचारधारा ने समाज को रूढ़ियों और अंधविश्वासों से लड़ने की शक्ति दी है और सामाजिक, धार्मिक तथा आर्थिक समस्याओं से छुटकारा पाने में मदद की है।
डॉ. सिंह ने कहा था कि जैन धर्म भारतीय बौद्धिक परंपरा का एक अभिन्न अंग है, जिसने अतीत में भारत को गौरव दिलाया। अहिंसा के प्रति जैन धर्म का दृष्टिकोण जीवन और प्रकृति के बीच तालमेल स्थापित करने की शैली प्रदान करता है, जो आज के भौतिकवादी युग में और भी प्रासंगिक हो गया है।
डॉ. मनमोहन सिंह का नेतृत्व, उनके संवेदनशील निर्णय और सभी समुदायों के प्रति समान दृष्टिकोण उन्हें भारतीय राजनीति और समाज में एक विशिष्ट स्थान दिलाते हैं। उनके द्वारा शुरू किए गए कार्य और दिए गए संदेश आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।