अशोकनगर स्थित गुरुपूर्णिमा आश्रम में वेदान्ताचार्य पंडित राज नारायण दीक्षित के पावन सानिध्य में बुधवार को भव्य कलश यात्रा के साथ गुरु पूर्णिमा महोत्सव का शुभारंभ हुआ। धार्मिक उत्साह और श्रद्धा के माहौल में आयोजित कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं महिलाएं शामिल हुईं।
महोत्सव के प्रथम दिन आचार्य राज नारायण दीक्षित ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच सर्वतोभद्र, नवग्रह एवं कलश पूजन संपन्न कराया। इसके बाद कानपुर से पधारे आचार्य शशिकान्त पाण्डेय ने श्रीमद्भागवत महापुराण की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि भागवत मोक्ष प्रदान करने वाला ग्रंथ है, जिसके श्रवण मात्र से जीव का कल्याण और उद्धार संभव है।
उन्होंने ज्ञान, वैराग्य और भक्ति के प्रसंग को संगीतमय शैली में प्रस्तुत करते हुए बताया कि वृंदावन में भक्ति सदैव युवा रहती है, जबकि उसके पुत्र ज्ञान और वैराग्य वृद्ध हो जाते हैं। श्रीमद्भागवत कथा के प्रभाव से उनमें पुनः चेतना और जागृति का संचार होता है। आचार्य पाण्डेय ने भागवत महात्म्य की चर्चा करते हुए गोकर्ण उपाख्यान का वर्णन किया और बताया कि विद्वान गोकर्ण ने श्रीमद्भागवत कथा के माध्यम से पापाचारी धुन्धकारी को प्रेत योनि से मुक्ति दिलाकर उसे सद्गति प्रदान की थी।
कार्यक्रम में रामकथा वाचक आचार्य देवेश अवस्थी ने भगवान राम के नाम की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि राम नाम ऐसा दिव्य रत्न है, जिसे जिह्वा रूपी देहरी पर स्थापित कर लेने से जीवन के भीतर और बाहर दोनों ओर प्रकाश फैल जाता है। उन्होंने रघुवंश महाकाव्य के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए राजा दिलीप की गौसेवा, रघु के जन्म, रघु और इन्द्र के युद्ध तथा दानवीर राजा रघु द्वारा ऋषि पुत्र कौत्स के लिए चौदह करोड़ स्वर्ण मुद्राओं की व्यवस्था करने के प्रेरक प्रसंग सुनाए।
पूरे कार्यक्रम के दौरान श्रद्धालु भक्तों ने भक्ति और श्रद्धा भाव से कथा श्रवण किया। इस अवसर पर सौरभ दीक्षित, राजू सोनी सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। गुरु पूर्णिमा महोत्सव के शुभारंभ से आश्रम परिसर भक्तिमय वातावरण से सराबोर रहा।
