जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में शैक्षिक सत्र 2026-27 की पूर्वदशम एवं दशमोत्तर छात्रवृत्ति तथा शुल्क प्रतिपूर्ति योजनाओं के प्रभावी, पारदर्शी एवं समयबद्ध संचालन को लेकर महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज कल्याण, पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों के साथ विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य, प्राचार्य एवं छात्रवृत्ति नोडल अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप प्रत्येक पात्र छात्र को छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति का लाभ समय से उपलब्ध कराया जाना चाहिए। उन्होंने सभी विभागों और शिक्षण संस्थानों को निर्धारित समय-सारिणी का कड़ाई से पालन करने तथा आवेदन पत्रों का निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण सत्यापन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
बैठक में पूर्वदशम छात्रवृत्ति योजना के प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया गया कि सामान्य वर्ग, अनुसूचित जाति एवं अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए अभिभावक की वार्षिक आय सीमा 2.50 लाख रुपये तथा अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए 2.00 लाख रुपये निर्धारित है। आय प्रमाण-पत्र पूरे पाठ्यक्रम के दौरान एक बार ही मान्य होगा। साथ ही छात्रों के बैंक खातों को आधार से सीडिंग एवं एनपीसीआई-डीबीटी से मैप कराना अनिवार्य होगा।
दशमोत्तर छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के संबंध में अधिकारियों ने बताया कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए आय सीमा 2.50 लाख रुपये तथा सामान्य, पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए 2.00 लाख रुपये निर्धारित की गई है। हाईस्कूल अभिलेखों के अनुरूप आधार विवरण का अद्यतन होना आवश्यक होगा तथा केवल मान्यता प्राप्त बोर्ड से हाईस्कूल उत्तीर्ण छात्रों को ही योजना का लाभ मिलेगा।
बैठक में व्यावसायिक एवं तकनीकी पाठ्यक्रमों के लिए भी महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए गए। बताया गया कि छात्रवृत्ति का लाभ केवल उन्हीं विद्यार्थियों को मिलेगा जिन्होंने राष्ट्रीय अथवा राज्य स्तरीय संयुक्त प्रवेश परीक्षा के माध्यम से प्रवेश प्राप्त किया है। ए.के.टी.यू. एवं बी.टी.ई. के मैनेजमेंट कोटे से प्रवेशित छात्रों के आवेदन अग्रसारित नहीं किए जाएंगे।
जिलाधिकारी ने सभी शिक्षण संस्थानों को छात्रवृत्ति पोर्टल पर निर्धारित समय के भीतर डिजिटल हस्ताक्षर के माध्यम से मास्टर डाटा अद्यतन एवं लॉक करने के निर्देश दिए। उन्होंने आधार आधारित बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण, बैंक खातों की आधार सीडिंग, एनपीसीआई मैपिंग तथा आय, जाति और निवास प्रमाण-पत्रों के समयबद्ध सत्यापन पर विशेष जोर दिया।
बैठक में एआईएसएचई एवं यू-डाइस कोड की अनिवार्यता, विश्वविद्यालयों द्वारा मास्टर डाटा एवं परीक्षाफल के सत्यापन, डिजिटल हस्ताक्षर की अनिवार्यता तथा छात्रवृत्ति प्रक्रिया के प्रत्येक चरण की सूचना छात्रों को एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराने संबंधी प्रावधानों की भी विस्तृत जानकारी दी गई।
अंत में जिलाधिकारी ने सभी अधिकारियों एवं शिक्षण संस्थानों को निर्देशित किया कि छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति से संबंधित प्रत्येक आवेदन का गुणवत्तापूर्ण सत्यापन सुनिश्चित करते हुए पात्र विद्यार्थियों को बिना किसी विलंब के योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराया जाए, ताकि शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अधिकतम छात्रों तक पहुंच सके।
बैठक में मुख्य विकास अधिकारी संजय कुमार सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक अतुल सिंह, जिला समाज कल्याण अधिकारी संध्या रानी बघेल, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी प्रदीप तिवारी सहित विभिन्न शिक्षण संस्थानों के प्रधानाचार्य एवं अधिकारी उपस्थित रहे।
