प्रसिद्ध हजारी महादेव मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं से बाइक पार्किंग के नाम पर 30 रुपये वसूले जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पार्किंग शुल्क की रसीदें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद श्रद्धालुओं, स्थानीय नागरिकों और व्यापारिक संगठनों ने मेला कमेटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। लोगों का आरोप है कि आस्था के केंद्र पर श्रद्धालुओं से मनमाने ढंग से शुल्क वसूला जा रहा है।
सोमवार को मंदिर में दर्शन करने पहुंचे कई श्रद्धालुओं को बाइक पार्किंग के लिए 30 रुपये की पर्ची दी गई। इससे नाराज भक्तों ने इसे ‘अवैध वसूली’ और ‘आस्था के नाम पर शोषण’ बताते हुए विरोध जताया। पार्किंग रसीदों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे मामला चर्चा का विषय बन गया है।
बताया जा रहा है कि आरएसएस कार्यकर्ता आनंद मिश्रा का भी पार्किंग शुल्क को लेकर स्टैंड संचालकों से विवाद हो गया। उन्होंने जिलाधिकारी से हस्तक्षेप कर इस व्यवस्था पर रोक लगाने और मामले की जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि हजारी महादेव मंदिर में प्रत्येक सोमवार को 50 हजार से अधिक श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। बड़ी संख्या में डाक कांवड़िए और ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले भक्त बाइक से मंदिर पहुंचते हैं। आरोप है कि मंदिर के समीप पहुंचते ही उन्हें अनिवार्य रूप से बाइक स्टैंड पर वाहन खड़ा करने के लिए कहा जाता है और प्रति बाइक 30 रुपये शुल्क वसूला जाता है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष रवी चक्रवर्ती और अनिल कौशल ने इस व्यवस्था का विरोध करते हुए कहा कि जिले के अन्य किसी भी मेले या धार्मिक स्थल पर बाइक पार्किंग के लिए इतना अधिक शुल्क नहीं लिया जाता। उन्होंने कहा कि सरसईनावर में मेला कमेटी श्रद्धालुओं की आस्था का लाभ उठाकर उनसे अतिरिक्त धन वसूल रही है। दोनों व्यापारिक नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पार्किंग शुल्क को अधिकतम 10 रुपये निर्धारित करने की मांग की है।
श्रद्धालुओं ने इस संबंध में जिलाधिकारी को व्हाट्सएप के माध्यम से भी शिकायत भेजी है। उनका कहना है कि कुछ मिनटों के दर्शन के लिए 30 रुपये का शुल्क पूरी तरह अनुचित है और इससे दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
मामले का एक अन्य पहलू यह भी है कि मंदिर में आने वाले चार पहिया वाहनों की पार्किंग व्यवस्था प्रशासन द्वारा संचालित की जा रही है और वह पूरी तरह निशुल्क है। जबकि दोपहिया वाहनों के लिए पार्किंग का ठेका देकर शुल्क वसूला जा रहा है। इससे लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि जब चार पहिया वाहनों से कोई शुल्क नहीं लिया जा रहा, तो केवल बाइक चालकों पर ही आर्थिक बोझ क्यों डाला जा रहा है।
इस संबंध में उपजिलाधिकारी ताखा विजय प्रकाश मिश्रा ने कहा कि यदि बाइक पार्किंग के लिए 30 रुपये शुल्क लिया जा रहा है तो यह निश्चित रूप से अधिक है। उन्होंने बताया कि मामले की तत्काल जांच कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन के इस आश्वासन के बाद श्रद्धालु अब जांच और निर्णय का इंतजार कर रहे हैं।
