ऊसराहार। केंद्र सरकार के प्रस्तावित बिज निजीकरण बिल-2025 तथा प्रदेश सरकार द्वारा पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों को निजी घरानों को सौंपे जाने के विरोध में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) 1 जून (आज) को जिला कचहरी पर प्रदर्शन करेगी। इसके बाद अधीक्षण अभियंता विद्युत को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा जाएगा।
यह जानकारी माकपा के जिला सचिव नाथूराम यादव ने दी। उन्होंने बताया कि पार्टी बिजली क्षेत्र के निजीकरण के साथ-साथ विद्युत उपभोक्ताओं पर बढ़ाए जा रहे आर्थिक बोझ का भी विरोध कर रही है। उन्होंने पावर कॉरपोरेशन द्वारा ईंधन अधिभार के नाम पर जून माह के बिजली बिलों में 10 प्रतिशत अतिरिक्त राशि वसूलने की घोषणा को तत्काल वापस लेने की मांग की।
नाथूराम यादव ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में सरकारी विभागों पर लगभग 14,400 करोड़ रुपये का बिजली राजस्व बकाया है, लेकिन उसकी वसूली के लिए पावर कॉरपोरेशन प्रभावी कदम नहीं उठा रहा है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2024-25 में पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम 2,253 करोड़ रुपये तथा दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम 3,011 करोड़ रुपये के लाभ में रहे हैं। इसके अतिरिक्त प्रदेश के बिजली उपभोक्ताओं का विद्युत कंपनियों पर 5,100 करोड़ रुपये से अधिक का सरप्लस भी है।
उन्होंने कहा कि इसके बावजूद वर्ष 2026-27 के लिए 16,448 करोड़ रुपये का कृत्रिम घाटा दर्शाकर बिजली दरों में वृद्धि की साजिश की जा रही है। माकपा जिला सचिव ने आरोप लगाया कि यूपी पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड और शासन के कुछ बड़े अधिकारियों की चुनिंदा औद्योगिक घरानों से मिलीभगत है, जिसके चलते बिजली क्षेत्र का निजीकरण किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की नीतियां गरीब और मध्यम वर्ग के उपभोक्ताओं को प्रभावित करेंगी तथा निजीकरण से बिजली सेवाएं महंगी होने का खतरा बढ़ेगा। माकपा ने बिजली विभाग में लंबे समय से खाली पड़े हजारों पदों को तत्काल भरने तथा संविदा कर्मचारियों को नियमित किए जाने की भी मांग की है।
पार्टी पदाधिकारियों ने आम जनता, किसानों, मजदूरों और बिजली उपभोक्ताओं से प्रदर्शन में शामिल होकर निजीकरण विरोधी आंदोलन को मजबूत बनाने की अपील की है।
