शिमला। हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा और सख्त कदम उठाते हुए सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार ने दलबदल करने वाले विधायकों के खिलाफ ऐतिहासिक विधेयक पेश किया है। बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को विधानसभा में प्रस्तुत इस प्रस्ताव को राजनीतिक स्थिरता की दिशा में अहम माना जा रहा है।
विधेयक में अधिनियम की धारा 6-बी में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है। इसके तहत अब 14वीं विधानसभा (वर्तमान) या उसके बाद निर्वाचित कोई भी विधायक यदि दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्य घोषित होता है, तो उसकी पेंशन तत्काल प्रभाव से बंद कर दी जाएगी।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने सदन में स्पष्ट कहा कि जो जनप्रतिनिधि जनता के जनादेश के खिलाफ जाकर दलबदल करते हैं, वे करदाताओं के पैसे से पेंशन पाने के हकदार नहीं हैं। उन्होंने इस कदम को राजनीतिक नैतिकता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी बताया।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह विधेयक भविष्य में दलबदल की घटनाओं पर अंकुश लगाने के साथ-साथ सरकारों को अस्थिर करने की कोशिशों पर भी रोक लगाएगा। यदि यह कानून लागू होता है, तो अन्य राज्यों में भी इस तरह के कड़े प्रावधानों की मांग तेज हो सकती है।
