नई दिल्ली। भारत के कोयला गैसीकरण रोडमैप को गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए भारत कोल गैसीफिकेशन एंड केमिकल्स लिमिटेड (बीसीजीसीएल) और महानदी कोलफील्ड्स लिमिटेड (एमसीएल) के बीच ओडिशा के लखनपुर में प्रस्तावित कोल टू अमोनियम नाइट्रेट परियोजना के लिए ऐतिहासिक भूमि पट्टा समझौते पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में नई दिल्ली में संपन्न हुआ।

यह परियोजना 2000 टीपीडी क्षमता की अमोनियम नाइट्रेट इकाई के रूप में विकसित की जाएगी और खास बात यह है कि इसमें भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड द्वारा विकसित स्वदेशी गैसीफिकेशन तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इसे भारत की पहली ऐसी कोयला गैसीकरण परियोजना माना जा रहा है, जो ऊर्जा और रसायन क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को नई दिशा देगी।

करीब 350 एकड़ भूमि में प्रस्तावित यह परियोजना एमसीएल के अधीन क्षेत्र में स्थापित होगी। कोयला मंत्रालय द्वारा किए गए नीतिगत सुधारों के तहत कोल बेयरिंग एरिया (सीबीए) भूमि का उपयोग अब कोयला गैसीकरण परियोजनाओं के लिए संभव हो सका है, जिससे देश के कोयला संसाधनों का मूल्य संवर्धित उपयोग सुनिश्चित होगा।
सरकार ने कोयला गैसीकरण को बढ़ावा देने के लिए 1,350 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता भी प्रदान की है। परियोजना तेजी से आगे बढ़ रही है, जिसमें एलएसटीके-1 और एलएसटीके-2 पैकेज बीएचईएल को दिए गए हैं, जबकि एलएसटीके-3 और एलएसटीके-4 लार्सन एंड टुब्रो को सौंपे गए हैं। साइट विकास कार्य जैसे बाउंड्री वॉल निर्माण और वृक्ष गणना भी तेजी से जारी हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत के विजन के अनुरूप सरकार कोयला क्षेत्र में व्यापक बदलाव ला रही है। उन्होंने कहा कि देश के विशाल कोयला भंडारों का उपयोग अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर गैसीफिकेशन जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से किया जाएगा।
उन्होंने जानकारी दी कि कोयला गैसीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए मंत्रिमंडल ने 8,500 करोड़ रुपये के परिव्यय को मंजूरी दी है और अब तक 7 परियोजनाओं को अंतिम रूप दिया जा चुका है, जिनमें से 3 का भूमि पूजन भी हो चुका है। एमसीएल और बीसीजीसीएल के बीच लगभग 25,000 करोड़ रुपये के निवेश वाले इस समझौते को उन्होंने क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि बताया।
मंत्री ने कहा कि कोयला गैसीकरण आयात पर निर्भरता कम करने और विदेशी मुद्रा की बचत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने वैश्विक प्रौद्योगिकी के साथ-साथ स्वदेशी क्षमताओं को मजबूत करने पर जोर दिया और उद्योग जगत व निवेशकों से सक्रिय भागीदारी की अपील की।
उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारी उद्योग मंत्रालय और वाणिज्य मंत्रालय के समन्वित प्रयासों से इस परियोजना को समय से पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
