नई दिल्ली। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना (ईसीएमएस) के तहत 29 नए प्रस्तावों को मंजूरी प्रदान की है। इन प्रस्तावों के तहत लगभग 7,104 करोड़ रुपये का निवेश और 84,515 करोड़ रुपये के उत्पादन का अनुमान है। इन स्वीकृतियों से करीब 14,246 प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद जताई गई है।
यह मंजूरी पहले स्वीकृत 46 आवेदनों (54,567 करोड़ रुपये) के अतिरिक्त है, जिससे देश में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र को और गति मिलेगी। वर्तमान स्वीकृत प्रस्तावों में 16 प्रमुख उत्पादों का निर्माण शामिल है, जिनका उपयोग मोबाइल, दूरसंचार, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, रणनीतिक उपकरण, ऑटोमोबाइल और आईटी हार्डवेयर जैसे विभिन्न क्षेत्रों में किया जाता है।

इन उत्पादों में डिस्प्ले मॉड्यूल, एंटिना, कैपेसिटर, कनेक्टर, हीट सिंक, लिथियम-आयन सेल, रिले, रेसिस्टर, ट्रांसड्यूसर, एसएमडी पैसिव कंपोनेंट्स, फ्लेक्सिबल पीसीबी और इंडक्टर जैसे महत्वपूर्ण घटक शामिल हैं। इसके साथ ही आपूर्ति श्रृंखला से जुड़े लैमिनेट, कैपेसिटर के लिए धातुयुक्त फिल्म और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट जैसे उत्पादों को भी शामिल किया गया है।
विशेष रूप से, इन स्वीकृतियों में देश का पहला टैंटलम आधारित एसएमडी पैसिव कैपेसिटर प्लांट, पहला फ्लेक्सिबल पीसीबी प्लांट और पहली रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट सुविधा स्थापित करने के प्रस्ताव भी शामिल हैं, जो भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता को मजबूत करेंगे।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के लिए चार प्रमुख प्राथमिकताओं पर जोर दिया। उन्होंने मजबूत डिजाइन क्षमताओं के विकास, घरेलू आपूर्ति श्रृंखला को सुदृढ़ करने, सिक्स सिग्मा गुणवत्ता मानकों को लागू करने और कुशल कार्यबल तैयार करने के लिए विशेष प्रशिक्षण केंद्र स्थापित करने की आवश्यकता बताई।
मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि ईसीएमएस योजना उद्योग जगत के बीच काफी लोकप्रिय रही है और सरकार ने तेजी से मंजूरी देकर इसे बढ़ावा दिया है। उन्होंने उद्योग से भी परियोजनाओं के शीघ्र क्रियान्वयन की अपेक्षा जताई।
वहीं, इंडिया सेल्युलर एंड इलेक्ट्रॉनिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज महिंद्रू ने केंद्रीय बजट में ईसीएमएस के लिए बढ़े आवंटन का स्वागत करते हुए कहा कि इससे इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश और विकास को और गति मिलेगी।
सरकार का मानना है कि इन कदमों से देश में मजबूत और विविध आपूर्ति श्रृंखला विकसित होगी तथा भारत वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण हब के रूप में उभरेगा।
