कोलकाता। गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित पनडुब्बी रोधी युद्धपोत ‘एग्रे’ को 30 मार्च 2026 को भारतीय नौसेना को सौंप दिया गया। यह आठ एएसडब्ल्यू शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW SWC) परियोजना के तहत चौथा जहाज है।
जीआरएसई द्वारा इन युद्धपोतों का डिजाइन और निर्माण भारतीय जहाजरानी रजिस्टर (आईआरएस) के वर्गीकरण नियमों के अनुसार किया गया है, जो स्वदेशी रक्षा जहाज निर्माण की सफलता को दर्शाता है।

करीब 77 मीटर लंबे ये युद्धपोत जलजेट तकनीक से संचालित भारतीय नौसेना के सबसे बड़े जहाज हैं। इनमें अत्याधुनिक हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी के सोनार लगाए गए हैं, जो समुद्र के भीतर छिपे खतरों का प्रभावी ढंग से पता लगाने और उनसे निपटने में सक्षम बनाते हैं। इस जहाज के शामिल होने से नौसेना की पनडुब्बी रोधी, बारूदी सुरंग रोधी क्षमताओं और तटीय निगरानी प्रणाली को और मजबूती मिलेगी।
‘एग्रे’ नाम भारतीय नौसेना की समृद्ध परंपरा को भी आगे बढ़ाता है। यह पूर्व के आईएनएस एग्रे का पुनरोद्धार है, जो 1241 पीई श्रेणी के गश्ती पोतों में शामिल था और वर्ष 2017 में सेवामुक्त किया गया था।
इस युद्धपोत की डिलीवरी स्वदेशी जहाज निर्माण के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है। यह आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप है, जिसमें 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है। यह उपलब्धि देश के रक्षा विनिर्माण इकोसिस्टम की बढ़ती मजबूती और आयात पर निर्भरता कम करने के प्रयासों को भी दर्शाती है।
