नई दिल्ली। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) और गति शक्ति विश्वविद्यालय (जीएसवी) के बीच विमानन, विमानन इंजीनियरिंग और विमानन प्रबंधन के क्षेत्रों में ज्ञान और कौशल के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते पर डीजीसीए के प्रमुख फैज़ अहमद किदवई और जीएसवी के कुलपति प्रो. मनोज चौधरी ने हस्ताक्षर किए।
यह समझौता केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू तथा केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में हुआ। इस दौरान नागरिक उड्डयन सचिव समीर कुमार सिन्हा, रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष सतीश कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू ने इस एमओयू को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह भविष्य के लिए कुशल कार्यबल तैयार करने की दिशा में एक बड़ा कदम है, जो पूरे विमानन क्षेत्र को परिवर्तित कर सकता है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्षों में “हवाई चप्पल से हवाई जहाज” तक की यात्रा को साकार किया गया है, जिससे विमानन क्षेत्र अधिक समावेशी बना है।
इस समझौते का मुख्य उद्देश्य उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के बीच साझेदारी को मजबूत करना है, ताकि विमानन और एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहाल) क्षेत्र के लिए गुणवत्तापूर्ण मानव संसाधन तैयार किए जा सकें। इसके तहत एविएशन मेंटेनेंस इंजीनियरिंग (एएमई) में तीन वर्षीय बी.एससी. पाठ्यक्रम शुरू किया जाएगा, जो शैक्षणिक सत्र 2026-27 (अगस्त 2026) से लागू होगा।

एमओयू के तहत जीएसवी, डीजीसीए के साथ मिलकर सतत विमानन ईंधन (एसएएफ), विमान रखरखाव, पुर्जों के निर्माण और उनके एकीकरण जैसे क्षेत्रों में शोध और जानकारी साझेदारी करेगा। साथ ही, जीएसवी डीजीसीए अधिकारियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण में भी सहयोग प्रदान करेगा।
मंत्री नायडू ने बताया कि देश में विमानन क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और वर्तमान में लगभग 1700 विमानों के ऑर्डर हैं, जो भविष्य में बढ़कर 3000 तक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आने वाले 10 वर्षों में 10,000 से 12,000 पायलटों की आवश्यकता होगी, जिसे पूरा करने के लिए देश में ही प्रशिक्षण सुविधाओं को मजबूत करना जरूरी है।
वहीं, अपने संबोधन में मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि जीएसवी पहले ही वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना चुका है और 62 उद्योग साझेदारों के साथ मिलकर उद्योग-उन्मुख पेशेवर तैयार कर रहा है। उन्होंने विश्वविद्यालय में प्रिसीजन मैन्युफैक्चरिंग इंजीनियरिंग के लिए उत्कृष्टता केंद्र स्थापित करने का सुझाव भी दिया।

यह एमओयू नियमन, शिक्षा और उद्योग के बीच एक मजबूत सेतु का काम करेगा। इससे भारत में न केवल विमान रखरखाव बल्कि विमान निर्माण के क्षेत्र को भी बढ़ावा मिलेगा और देश को एक वैश्विक एमआरओ हब के रूप में स्थापित करने में मदद मिलेगी।
