जनपद इटावा के थाना सैफई क्षेत्र अंतर्गत ग्राम नगला अजाब में दबंगई और पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि डायल 112 द्वारा रंगेहाथ पकड़े गए हमलावरों को थाने में ‘सेटिंग’ कर बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया। मामले के तूल पकड़ने के बाद क्षेत्राधिकारी (CO) सैफई ने जांच के आदेश दे दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, ग्राम नगला अजाब निवासी सत्यवती देवी पत्नी प्रदीप कुमार बुधवार दोपहर करीब 2 बजे अपने पुत्र रोहित के साथ खेत पर सरसों की फसल कटवाने ट्रैक्टर से जा रही थीं। इसी दौरान पड़ोसी श्याम बिहारी के पुत्र त्यागी व श्रीकांत तथा उनके साथी लालू और गोलू ने उनका रास्ता रोक लिया। विरोध करने पर आरोपियों ने मां-बेटे पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया, जिससे दोनों गंभीर रूप से घायल हो गए।
घटना की सूचना मिलते ही डायल 112 (PRV) टीम मौके पर पहुंची और त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपियों को हिरासत में लेकर थाना सैफई पहुंचाया। लेकिन यहीं से मामले ने नया मोड़ ले लिया।
पीड़िता ने आरोप लगाया है कि हल्का इंचार्ज नूर मुहम्मद ने आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने के बजाय उन्हें बचाने का प्रयास किया। आरोप है कि बिना एफआईआर दर्ज किए और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाए बिना ही आरोपियों को थाने से छोड़ दिया गया। इतना ही नहीं, पीड़िता का यह भी कहना है कि जब वह न्याय की गुहार लेकर थाने पहुंची, तो उसे डराकर भगा दिया गया।
मामला सोशल मीडिया पर वायरल होने और उच्चाधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। क्षेत्राधिकारी (CO) सैफई केपी सिंह ने कहा,
“मामले की जांच शुरू कर दी गई है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या मिलीभगत पाए जाने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। कानून से खिलवाड़ किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
घटना के बाद पीड़ित परिवार भय के साये में जी रहा है और प्रशासन से न्याय की गुहार लगा रहा है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद क्या वाकई दोषियों पर कार्रवाई होती है या मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है।
