भारतीय रेल में सुरक्षा उपायों से दुर्घटनाओं में कमी, ‘कवच’ प्रणाली का विस्तार

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नई दिल्ली। भारतीय रेल में सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए पिछले कुछ वर्षों में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं, जिनके परिणामस्वरूप रेल दुर्घटनाओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी आई है।

रेल मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मानवीय त्रुटियों के कारण होने वाली दुर्घटनाओं को कम करने के लिए 28 फरवरी 2026 तक 6,665 स्टेशनों पर प्वाइंट और सिग्नल के केंद्रीकृत संचालन के साथ विद्युत/इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं।

लेवल क्रॉसिंग (एलसी) गेटों पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए भी व्यापक कार्य किया गया है। 28 फरवरी 2026 तक 10,153 लेवल क्रॉसिंग गेटों पर इंटरलॉकिंग की व्यवस्था लागू की गई है, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना में कमी आई है।

इसके अतिरिक्त, 6,669 स्टेशनों पर ट्रैक सर्किट की पूर्ण व्यवस्था की गई है, जिससे विद्युत माध्यमों से ट्रैक की उपलब्धता की पुष्टि कर सुरक्षा को और सुदृढ़ किया गया है।

भारतीय रेल ने स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (एटीपी) प्रणाली ‘कवच’ को लागू करने का निर्णय लिया है। यह प्रणाली उच्चतम स्तर (एसआईएल-4) की सुरक्षा प्रमाणन के अनुरूप है। जुलाई 2020 में ‘कवच’ को राष्ट्रीय एटीपी प्रणाली के रूप में अपनाया गया था।

दक्षिण मध्य रेलवे के 1465 किलोमीटर मार्ग पर ‘कवच’ संस्करण 3.2 के सफल संचालन और अनुभव के आधार पर इसमें और सुधार किए गए। इसके बाद ‘कवच’ संस्करण 4.0 को 16 जुलाई 2024 को रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन द्वारा अनुमोदित किया गया।

व्यापक परीक्षणों के पश्चात ‘कवच’ संस्करण 4.0 को 1,452 किलोमीटर मार्ग पर सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिसमें दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे उच्च घनत्व वाले रेल मार्ग शामिल हैं। यह प्रणाली ट्रेनों की टक्कर को रोकने और सुरक्षित संचालन सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।

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