उत्तर प्रदेश सरकार के पशुधन एवं दुग्ध विकास तथा राजनैतिक पेंशन विभाग के राज्यमंत्री श्री धर्मपाल सिंह ने कलेक्ट्रेट स्थित नवीन सभागार में निराश्रित गोवंश संरक्षण एवं गोचर भूमि को कब्जा मुक्त कराने के संबंध में एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक में जिले की गौशालाओं की व्यवस्थाओं, पशुपालन योजनाओं तथा गोचर भूमि के संरक्षण से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई।

बैठक में मंत्री धर्मपाल सिंह ने पशु चिकित्साधिकारी को निर्देश देते हुए कहा कि अच्छे और विश्वसनीय एनजीओ को गोवंश सौंपे जाएं तथा सभी गौशालाओं में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएं और उनके संचालन के लिए एक कंट्रोल रूम भी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि शहर की गौशालाओं में कम से कम 10 दूध देने वाली गायों को रखा जाना चाहिए।
उन्होंने बताया कि गौशालाओं के बेहतर संचालन के लिए मुख्यमंत्री के निर्देश पर छह विभागों की समिति गठित की गई है। मंत्री ने निर्देश दिए कि मार्च माह तक भूसे की आपूर्ति के लिए टेंडर हर हाल में सुनिश्चित किया जाए तथा भूसा दान के लिए जनप्रतिनिधियों और समाजसेवियों से भी सहयोग लिया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि इटावा की सीमाएं सील की जाएं, ताकि यहां से भूसा बाहर न जाने पाए।

मंत्री ने गौशालाओं में पशुओं के रख-रखाव, हरे चारे की व्यवस्था, लू से बचाव के उपाय, विद्युत आपूर्ति, स्वच्छ पेयजल तथा सीसीटीवी निगरानी की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि गाय सुखी रहेगी तो समाज भी सुखी रहेगा। उन्होंने भदावरी भैंस के संरक्षण एवं संवर्धन पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि “खेती है तो पशु हैं और पशु हैं तो किसान है”, इसलिए पशुपालन किसानों की आय बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। मंत्री ने बकरी पालन को बढ़ावा देने, पशु मेलों के आयोजन तथा पशु विज्ञान के अध्ययन पर भी जोर दिया। उन्होंने संचारी रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत समय पर टीकाकरण सुनिश्चित करने और गौशालाओं में कार्यरत केयरटेकर का भुगतान समय से करने के निर्देश भी दिए।

बैठक में बताया गया कि जैव विविधता से समृद्ध उत्तर प्रदेश में देश का सर्वाधिक पशुधन है। वर्ष 2019 की 20वीं पशुगणना के अनुसार प्रदेश में 190.20 लाख गोवंश, 330.17 लाख महिषवंश, 9.85 लाख भेड़, 144.80 लाख बकरी और 4.09 लाख सूकर हैं। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में 387.79 लाख मीट्रिक टन दुग्ध उत्पादन, 589.48 करोड़ अंडा उत्पादन, 1259 हजार टन मांस उत्पादन तथा 8.29 लाख किलोग्राम ऊन का उत्पादन हुआ।
मोबाइल वेटरिनरी यूनिट के माध्यम से वर्ष 2024-25 में 15.93 लाख पशुपालकों के 32.34 लाख पशुओं तथा वर्ष 2025-26 में अब तक 5.70 लाख पशुपालकों के 11.16 लाख पशुओं को चिकित्सीय सुविधा उपलब्ध कराई गई। पशुपालकों को घर पर ही चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 520 मोबाइल वेटरिनरी यूनिट संचालित की जा रही हैं, जिनके लिए टोल फ्री नंबर 1962 जारी है।

बैठक में यह भी बताया गया कि प्रदेश में वर्तमान में 7608 गो-आश्रय स्थलों में 12,36,815 गोवंश संरक्षित हैं तथा अभियान चलाकर अब तक 11,952.62 हेक्टेयर गोचर भूमि कब्जामुक्त कराई जा चुकी है। इनमें से 6480 हेक्टेयर भूमि पर नेपियर सहित अन्य हरे चारे की खेती की गई है।
मंत्री ने पशुधन विकास के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं जैसे नंद बाबा दुग्ध मिशन, नंदिनी कृषक समृद्धि योजना, मिनी नंदिनी योजना, मुख्यमंत्री स्वदेशी गो संवर्धन योजना तथा मुख्यमंत्री प्रगतिशील पशुपालक प्रोत्साहन योजना की प्रगति की भी समीक्षा की। इसके साथ ही कुक्कुट विकास नीति, बकरी पालन, भेड़ पालन और सूकर पालन योजनाओं के माध्यम से रोजगार सृजन और किसानों की आय बढ़ाने पर भी चर्चा की गई।
बैठक के अंत में मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम ने मंत्री का आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष अन्नू गुप्ता, मुख्य विकास अधिकारी अजय कुमार गौतम, पशु चिकित्साधिकारी डॉ. धर्मेन्द्र सिंह, उप जिलाधिकारी सदर विक्रम सिंह राघव, जिला विकास अधिकारी राकेश प्रसाद, जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी रमेश चन्द्र, नगर पालिका परिषद के अधिशासी अधिकारी संतोष कुमार मिश्र, श्याम बचन सरोज, डिप्टी सीवीओ, समस्त खंड विकास अधिकारी तथा अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
