बकेवर:- लवेदी क्षेत्र के ग्राम नीलदेवता में चल रही श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य दिव्य प्रकाश ने कहा कि मनुष्य जीवन में जाने अनजाने प्रतिदिन कई पाप होते है। उनका ईश्वर के समक्ष प्रायश्चित करना ही एक मात्र मुक्ति पाने का उपाय है। श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तीसरे दिन कथा में उपस्थित श्रद्धालुओं को कथा का श्रवण कराते हुए उन्होंने जीवन में सत्संग व शास्त्रों में बताए आदर्शों का श्रवण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सत्संग में वह शक्ति है, जो व्यक्ति के जीवन को बदल देती है।
उन्होंने कहा कि व्यक्तियों को अपने जीवन में क्रोध, लोभ, मोह, हिंसा, संग्रह आदि का त्यागकर विवेक के साथ श्रेष्ठ कर्म करने चाहिए। व्यासपीठाधीश्वर ने रविवार को भागवत कथा के दौरान कपिल चरित्र, सती चरित्र, धु्रव चरित्र, जड़ भरत चरित्र, नृसिंह अवतार आदि प्रसंगों पर प्रवचन करते हुए कहा कि भगवान के नाम मात्र से ही व्यक्ति भवसागर से पार उतर जाता है। उन्होंने भगवत कीर्तन करने, ज्ञानी पुरुषों के साथ सत्संग कर ज्ञान प्राप्त करने व अपने जीवन को सार्थक करने का आह्वान किया।
भजन मंडली की ओर से प्रस्तुत किए गए भजनों पर श्रोता भाव विभोर होकर नाचने लगे। वहीं कथा में परीक्षित आशाराम और सोनकली सहित प्रमोद, राजबीर, रामू, शम्भू, अजय, विजय, डॉ. राहुल, आदर्श, सचिन और सिद्धांत जैसे कई अन्य लोग शामिल थे। परीक्षित ने बताया कि कथा प्रतिदिन सुबह 11 बजे से शाम 4 बजे तक चलेगी और 25 फरवरी को इसका समापन होगा। 26 फरवरी को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने गांव और आसपास के क्षेत्र के सभी कथा प्रेमियों से कथा श्रवण करने की अपील की है।
