भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय संयुक्त सचिव और पूर्व जिलाध्यक्ष फोजीकेश यादव तथा जिला मंत्री लक्षेश शाक्य ने लखनऊ की नई मंडी का दौरा कर किसानों की समस्याओं को सुना और देखा। इस दौरान उन्होंने मंडी सचिव से वार्ता भी की।
भारतीय किसान संघ के महामंत्री मधुवन सिंह ने कहा कि किसानों के साथ सरकार बड़ा धोखा कर रही है। प्रधानमंत्री के वादों के अनुरूप समर्थन मूल्य की घोषणा तो की गई है, लेकिन वास्तविकता यह है कि किसानों को घोषित मूल्य भी नहीं मिल पा रहा है। इससे प्रतिदिन किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। यह डबल इंजन सरकार की किसान विरोधी नीतियों का परिणाम है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में धान और खरीफ की फसलों में प्रति वर्ष लगभग 3 लाख करोड़ रुपये का नुकसान किसानों को हो रहा है।
मधुवन सिंह ने आगे कहा कि लखनऊ की नई मंडी में रोजाना लगभग 30 से 35 हजार क्विंटल धान की आमद होती है, जिसमें 80 प्रतिशत उच्च श्रेणी (मंझला ग्रेड) का धान होता है, जिसका मूल्य लगभग ₹2350 प्रति क्विंटल चल रहा है, जबकि यही धान योगी सरकार के पहले ₹4000 से ₹5000 प्रति क्विंटल में बिकता था।
हाइब्रिड किस्म का धान वर्तमान में ₹1500 प्रति क्विंटल बिक रहा है, जबकि सरकार ने इसका समर्थन मूल्य ₹2369 प्रति क्विंटल घोषित किया है। स्वामीनाथन आयोग के अनुसार इसका मूल्य ₹3135 प्रति क्विंटल (₹766 अधिक) होना चाहिए, जिसका वादा प्रधानमंत्री मोदी ने किया था।
लखनऊ जिले में ही लखनऊ के अलावा हरदोई और तलवारा नगर की मंडियों में भी किसानों को करोड़ों रुपये का नुकसान झेलना पड़ रहा है।
