मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की महत्वाकांक्षी योजना “मुख्यमंत्री अभ्युदय कोचिंग योजना” इस समय इटावा में अव्यवस्थाओं की शिकार होती दिखाई दे रही है। जीआईसी स्थित शिक्षण केन्द्र में मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है। जहां एक ओर छात्र-छात्राओं को पढ़ने के लिए मात्र एक ही कमरा दिया गया है, वहीं दूसरी ओर छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की कोई व्यवस्था नहीं है। सभी को एनसीसी विंग के एकमात्र टॉयलेट का ही प्रयोग करना पड़ रहा है। पीने का पानी भी केवल स्कूल परिसर की टंकी से ही उपलब्ध है, जिससे छात्रों को काफी असुविधा हो रही है।
दूसरी ओर सैफई स्थित द्वितीय अभ्युदय कोचिंग केन्द्र में छात्रों को भीषण गर्मी में दो कमरों में बिना पंखे के पढ़ाई करनी पड़ रही है। कुल 14 पंखों में से 12 खराब पड़े हैं। छात्र-छात्राएं पसीने में भीगते हुए क्लास करने को मजबूर हैं जबकि अधिकारी वातानुकूलित दफ्तरों में बैठकर योजना संचालन कर रहे हैं। स्थिति इतनी बदतर है कि 21 जुलाई को शुरू हुई कक्षाएं मात्र 3-4 दिन ही चलीं और उसके बाद से बंद हैं।
कोचिंग सेंटर स्थानांतरण से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाली छात्राओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रमैयापुर, नगला सुभान, मोहनपुरा, चौबेपुर सहित कई गांवों से रोज़ आना-जाना करने वाली छात्राओं का कहना है कि अब उनके माता-पिता इस बदतर स्थिति के चलते उन्हें कोचिंग भेजने से मना कर रहे हैं। छात्राओं ने सवाल उठाया कि यदि यही हाल रहा तो गरीब बच्चों का अधिकारी बनने का सपना कैसे पूरा होगा।
वहीं विषय विशेषज्ञों के चयन में भी इस बार भारी अनियमितता देखने को मिली। सत्र 2025-26 में चयन प्रक्रिया में बिना पूर्व सूचना के लिखित परीक्षा कराई गई, जो शासनादेशों के विपरीत थी। न तो प्रश्न पत्र ले जाने की अनुमति दी गई और न ही परीक्षा के बाद OMR शीट दी गई। साथ ही परिणाम भी सार्वजनिक नहीं किया गया, जिससे अभ्यर्थियों में भारी रोष है। कई शिक्षकों ने इस प्रक्रिया पर प्रश्नचिन्ह उठाते हुए योजना से विश्वास उठने की बात कही है।
स्थिति को देखते हुए अब जरूरत है कि जिला प्रशासन और योजना से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी इन समस्याओं का तत्काल संज्ञान लें और छात्रों को एक अनुकूल शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में ठोस कदम उठाएं।
