रसूल अल्लाह के नवासे, मौला अली और शहज़ादी फ़ातिमा ज़हरा के बेटे, शहीद-ए-आजम इमाम हुसैन के भाई इमाम हसन अलैहे सलाम की पैदाइश के खुशनुमा मौके पर मस्जिद पंजतनी, इटावा में महफ़िल का आयोजन किया गया।
महफ़िल में मौलाना अनवारुल हसन ज़ैदी, इमामे जुमा इटावा ने तकरीर करते हुए कहा कि इमाम हसन की पैदाइश 15 रमज़ान 3 हिजरी को मदीने में हुई थी। उन्होंने अपने नाना रसूल अल्लाह के मिशन को आगे बढ़ाया। इमाम हसन एक साहसी योद्धा थे और उन्हें जिहाद करना पसंद था। लेकिन वक्त के जालिम बादशाह ने उन्हें ज़हर देकर शहीद कर दिया।
महफ़िल के दौरान मशहूर शायरों ने इमाम हसन की शान में कलाम पेश किए। तनवीर हसन ने कहा—
“कर्बोबला, नजफ़ ये मदीना हसन का है, अल मुख़्तसर तो ये है कि काबा हसन का है।”
अख्तर अब्बास रिज़वी ने पढ़ा—“जश्न-ए-हसन की अपनी बड़ी आनबान है, मौला-ए-दो जहां यहां मेजबान हैं।”
सलमान रिज़वी ने कहा—“मैं क्या बयां करुंगा तेरी शान या हसन, यज़दान जब है तेरा सना ख्वान या हसन।”
आबिद रज़ा ने अपने कलाम में इमाम हसन की सुल्ह को याद करते हुए कहा—
“जारी खुदा-ए-पाक का फरमान कर दिया, हर एक दींदार पे एहसान कर दिया। दुश्वारियों में दुश्मने हैदर को डालकर,
सुल्हे हसन ने दीन को आसान कर दिया।”
महफ़िल में ताबिश रिज़वी, आसिफ रिज़वी अश्शू, तबरेज़, मोहम्मद समेत कई अन्य लोगों ने भी कलाम पेश किए।
इस मौके पर समाजसेवी राहत अकील शककन के जन्मदिन पर मस्जिद पंजतनी में रोज़ा इफ्तार का आयोजन किया गया। लोगों ने उन्हें जन्मदिन की मुबारकबाद दी।
महफ़िल में अल्हाज कमर अब्बास नक़वी, राहत अकील, शावेज़ नक़वी, अयाज हुसैन, समर अब्बास, मो. अब्बास, जहूर नक़वी, सलीम रज़ा, तहसीन रज़ा, अबरार हुसैन, परवेज़ हसनैन, अली सौरिख, राहिल, अदनान, शौजब रिज़वी, जीशान हैदर, हसन अब्बास, शब्बर अकील, सैफू, आतिफ एडवोकेट, जावेद, जुनैद, सुहेल, हम्माद, अमान, राजा, आसिम रिज़वी, जुबैर रिज़वी, हसन अली, एहतिशाम हुसैन सहित बड़ी संख्या में लोगों ने शिरकत की।
यह महफ़िल इमाम हसन अलैहे सलाम की महानता और उनकी कुर्बानियों को याद करने का एक खास मौका बना, जिसमें अकीदतमंदों ने श्रद्धा और प्रेम के साथ भाग लिया।
