सरकार ने गांव-गांव में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लाखों रुपये खर्च कर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचसी) का निर्माण कराया, लेकिन कई साल गुजर जाने के बावजूद यहां बुनियादी सुविधाएं अधूरी पड़ी हैं। विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी और एक्स-रे मशीनों के अभाव के कारण मरीजों को जिला अस्पताल या सैफई मेडिकल कॉलेज की ओर रुख करना पड़ रहा है।
जिले में नौ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) संचालित हैं, जिनमें प्रमुख रूप से मेडिकल केयर यूनिट इटावा, भरथना, महेवा, जसवंतनगर, सैफई, राजपुर और उदी शामिल हैं। इन सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर बुनियादी चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध होनी चाहिए थीं, लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि यहां न तो विशेषज्ञ डॉक्टर हैं और न ही एक्स-रे मशीन जैसी आवश्यक सुविधाएं।
हर दिन सैकड़ों मरीज इलाज के लिए इन सीएचसी पर पहुंचते हैं, लेकिन जब उन्हें आवश्यक सुविधाएं नहीं मिलतीं, तो वे जिम्मेदार अधिकारियों को कोसते हुए मजबूरी में जिला अस्पताल या सैफई मेडिकल कॉलेज जाने को विवश होते हैं। इससे मरीजों को न सिर्फ अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ता है, बल्कि उनके कीमती समय की भी बर्बादी होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार ने इन सीएचसी के निर्माण पर भारी भरकम बजट खर्च किया, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण ये स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं। एक्स-रे मशीन और विशेषज्ञ डॉक्टरों की अनुपस्थिति से सबसे ज्यादा परेशानी गरीब और ग्रामीण इलाकों के मरीजों को उठानी पड़ रही है, जिन्हें इलाज के लिए दूर-दराज जाना पड़ता है।
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सीएचसी केंद्रों पर जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बनाई जा रही है। यदि जल्द ही इन स्वास्थ्य केंद्रों में जरूरी संसाधन नहीं जुटाए गए तो सरकार की लाखों रुपये की योजना का लाभ आम जनता तक नहीं पहुंच पाएगा और मरीजों की समस्याएं जस की तस बनी रहेंगी।
