जिला अस्पताल में पिछले एक महीने से इंसुलिन इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हो रही है, जिससे शुगर के मरीजों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्हें इलाज के लिए यह इंजेक्शन बाहर से खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। इसके साथ ही जिला अस्पताल में 289 दवाओं की उपलब्धता के सापेक्ष सिर्फ 274 दवाएं ही उपलब्ध हैं।
इससे भी बड़ी चिंता की बात यह है कि कई डॉक्टर कमीशन के चक्कर में मरीजों को बाहर की दवाएं लिख रहे हैं। मजबूरी में मरीज और उनके तीमारदार इन दवाओं को महंगे दामों पर बाहर के मेडिकल स्टोर से खरीदने के लिए विवश हो रहे हैं।
जिला अस्पताल में इंसुलिन इंजेक्शन की कमी के चलते कई बार निदेशालय को पत्र भेजा जा चुका है, लेकिन एक महीने से अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है। इसके अलावा एंटीबायोटिक दवा ‘सेफ्टानाइड’ की भी कमी हो गई है। अधिकतर डॉक्टर मरीजों को यह दवा बाहर से लेने की सलाह दे रहे हैं, और यह बताकर दिलासा भी दे रहे हैं कि बाहर से लिखी दवा बेहतर होती है।
जिला अस्पताल के बाहर 10 से अधिक मेडिकल स्टोर हैं, जहां सुबह 8 बजे से लेकर दोपहर 3 बजे तक मरीजों को दवाओं की खरीदारी के लिए आना-जाना पड़ता है। इस स्थिति में मरीजों को न केवल असुविधा हो रही है, बल्कि दवाओं के महंगे दामों का भी सामना करना पड़ रहा है।
