जिले में जरूरतमंद वर्ग के बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने के लिए चलाई जा रही आरटीई योजना को लेकर अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है। पहले चरण में 369 छात्रों को सीट आवंटित की गई थी, लेकिन अब तक दूसरे चरण में भी सिर्फ 374 बच्चों को ही सीट मिल पाई है, जबकि लक्ष्य 5,016 बच्चों का था।
शिक्षा का अधिकार (आरटीई) योजना के तहत जिले के 676 निजी विद्यालयों की 25 प्रतिशत सीटों पर अगले शैक्षिक सत्र 2025-26 के लिए प्रवेश दिए जाने हैं। इसके अंतर्गत शहरी क्षेत्र में 2,034 और ग्रामीण क्षेत्र में 2,982 सीटों पर प्रवेश की योजना है।
यह प्रक्रिया चार चरणों में संपन्न की जानी है, लेकिन अब तक दो चरणों की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, और सिर्फ 15 प्रतिशत सीटों पर ही बच्चों का प्रवेश हो पाया है। प्रचार-प्रसार की कमी के कारण जरूरतमंद अभिभावक अपने बच्चों को निजी स्कूलों में प्रवेश दिलाने के मामले में बहुत पीछे रह गए हैं। प्री-प्राइमरी और कक्षा एक में प्रवेश के लिए पहले चरण में ही काफी कमी महसूस की गई। अगर प्रचार-प्रसार के उपायों को बेहतर तरीके से लागू नहीं किया गया तो योजना का उद्देश्य अधूरा रह सकता है।
