केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मुद्रा लोन योजना अब बैंकों के लिए सिरदर्द बन गई है। इस योजना के तहत सरकार ने स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए युवाओं को लोन देने की सुविधा दी थी, लेकिन अब नौ साल बाद इसका नकारात्मक असर बैंकों पर दिखाई दे रहा है।
जिले में इस योजना का लाभ कुल 26,337 लोगों ने लिया था, लेकिन इनमें से 6,894 लोग ऐसे हैं जिन्होंने पूरी धनराशि वापस नहीं की। नतीजतन, बैंकों के पास साढ़े 37 करोड़ रुपये फंसे हुए हैं। इन खातेधारकों को एनपीए (नॉन-परफॉर्मिंग एसेट) घोषित कर दिया गया है, जिससे बैंकों को वित्तीय नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना का उद्देश्य था कि युवाओं को स्वरोजगार की दिशा में मदद मिल सके। अप्रैल 2015 में शुरू की गई इस योजना के तहत तीन श्रेणियों में 10 हजार रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का लोन दिया गया था। जिले में इस योजना का लाभ उठाने वाले लोगों में से अधिकांश छोटे व्यवसायी और स्वरोजगार से जुड़ने के इच्छुक थे।
