जसवंतनगर विश्व कुष्ठ दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की ओर से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में कुष्ठ रोगियों के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं और उपचार प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डॉक्टरों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य कर्मियों ने कुष्ठ रोग के प्रति जागरूकता फैलाने और रोगियों के प्रति समाज में फैली गलत धारणाओं को दूर करने पर जोर दिया।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. वीरेंद्र सिंह ने कुष्ठ रोग के कारणों और उपचार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अधिकतर मामलों में पानी में अधिक समय तक रहने या शरीर को नम रखने से कुष्ठ रोग के लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं, जैसे चकत्ते पड़ना और सुन्नपन होना। उन्होंने जोर देकर कहा कि कुष्ठ रोगियों के साथ घृणा का व्यवहार नहीं करना चाहिए, क्योंकि यह रोग पूरी तरह से ठीक हो सकता है। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोग का उपचार आमतौर पर छह महीने तक एमडीटी (मल्टी-ड्रग थेरेपी) से किया जाता है, लेकिन गंभीर मामलों में यह उपचार एक साल तक चल सकता है।

सामाजिक कार्यकर्ता प्रेम कुमार शाक्य ने कुष्ठ रोगियों के लिए सरकारी योजनाओं की जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि कुष्ठ रोगियों को पेंशन भी प्रदान की जाती है। इसके अलावा, मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना के तहत मार्च 2020 से अब तक पिता को खो देने वाले बच्चों को 2,500 रुपए प्रतिमाह और अनाथ बच्चों को 4,000 रुपए प्रतिमाह की आर्थिक सहायता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा ऐसी योजनाएं चलाई जा रही हैं ताकि कुष्ठ रोगियों और उनके परिवारों को आर्थिक और सामाजिक सहायता मिल सके।
शिविर के संयोजक और पीएलवी अधिकार मित्र ऋषभ पाठक ने विश्व कुष्ठ दिवस के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा निर्धन, पीड़ित और असहाय व्यक्तियों को नि:शुल्क कानूनी सहायता प्रदान की जाती है। उन्होंने कुष्ठ रोगियों के अधिकारों और उनके लिए उपलब्ध कानूनी सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी। कार्यक्रम का संचालन लालचंद्र ने किया।

इस कार्यक्रम में पीएलवी राजेंद्र यादव, लालमन बाथम, रामसुंदर दुबे और कु. नीरज ने सहयोग प्रदान किया। सीएचसी के स्टाफ, ट्रेनी स्टूडेंट्स और स्थानीय नागरिकों ने भी कार्यक्रम में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस तरह के आयोजनों से कुष्ठ रोग के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने और रोगियों के प्रति सहानुभूति का वातावरण बनाने में मदद मिलती है।
