इटावा। गुरुवार को इटावा में हुई दर्दनाक सड़क दुर्घटना में एक सात वर्षीय बच्ची और ई-रिक्शा चालक की मौत ने एक बार फिर स्कूली वाहनों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस हादसे के बाद भी जिले में स्कूली बच्चों को लेकर जा रहे ई-रिक्शा, ऑटो और वैनों में क्षमता से अधिक बच्चों को बैठाए जाने का सिलसिला जारी है।

जिले में 1100 से अधिक निजी स्कूल संचालित होते हैं और इन स्कूलों के वाहन अक्सर यातायात नियमों का उल्लंघन करते हुए बच्चों को ले जाते हैं। अधिकारी बच्चों की सुरक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे करते हैं, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। न तो कभी स्कूली वाहनों के खिलाफ कोई अभियान चलाया गया है और न ही स्कूल संचालकों के खिलाफ कोई कार्रवाई की गई है।
इस संबंध में जानकारों का कहना है कि स्कूली वाहनों के संचालन के लिए सख्त नियमों का पालन होना चाहिए। वाहनों की नियमित जांच होनी चाहिए और चालकों को प्रशिक्षित किया जाना चाहिए। साथ ही, स्कूलों को भी अपने वाहनों के संचालन पर कड़ी नजर रखनी चाहिए।
