
कार्यशाला के दौरान ई-फास्ट (Extended Focused Assessment with Sonography in Trauma) तकनीक पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत व्याख्यान दिए गए। इसके साथ ही अल्ट्रासाउंड का लाइव प्रदर्शन और वास्तविक मरीजों पर व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया गया। प्रतिभागियों को राइट एवं लेफ्ट अपर क्वाड्रेंट, पेल्विक तथा कार्डियक अल्ट्रासाउंड परीक्षण की तकनीकी बारीकियों से अवगत कराया गया।

विशेषज्ञों ने बताया कि ई-फास्ट तकनीक ट्रॉमा केयर में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके माध्यम से गंभीर रूप से घायल मरीजों की स्थिति का तेजी से आकलन करने और उपचार संबंधी महत्वपूर्ण निर्णय लेने में चिकित्सकों को सहायता मिलती है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्रति-कुलपति प्रो. (डॉ.) आदेश कुमार एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. (डॉ.) एस.पी. सिंह की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यशाला के सफल आयोजन में आयोजन सचिव डॉ. राम लखन सिंह वर्मा, सह-सचिव डॉ. गौरव मिश्रा, कोर्स संयोजक डॉ. विवेक कुमार तथा अतिथि वक्ता स्क्वाड्रन लीडर डॉ. आशीष सिंह तोमर का विशेष योगदान रहा। इसके अतिरिक्त सर्जरी विभाग के संकाय सदस्यों एवं रेजिडेंट चिकित्सकों ने भी सक्रिय भूमिका निभाई।

कार्यशाला में विशेषज्ञ व्याख्यान के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण पर विशेष जोर दिया गया, जिससे प्रतिभागी चिकित्सकों को आधुनिक अल्ट्रासाउंड तकनीक के प्रभावी उपयोग की जानकारी प्राप्त हुई।
विश्वविद्यालय की यह पहल ट्रॉमा केयर में आधुनिक तकनीक आधारित चिकित्सा प्रशिक्षण को बढ़ावा देने तथा आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को अधिक प्रभावी, त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस प्रकार के अकादमिक कार्यक्रमों से चिकित्सकों की दक्षता में वृद्धि होने के साथ-साथ गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में भी मदद मिलेगी।
