
यह कार्यक्रम भारतेंदु नाट्य अकादमी, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश शासन एवं जिला प्रशासन इटावा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित अखंड भारत के स्वातंत्र्य वीर नायकों पर आधारित नाट्य मंचन श्रृंखला के अंतर्गत संपन्न हुआ। कार्यक्रम का आयोजन माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की प्रेरणा तथा माननीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री जयवीर सिंह जी के मार्गदर्शन में किया गया। नाटक की परिकल्पना एवं निर्देशन श्री मिथिलेश सिंह ने किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला सामाजिक निदेशक वानिकी (डीएफओ) अभिषेक अजीत इनामदार ने दीप प्रज्वलित कर नाट्य मंचन का शुभारंभ किया। इस अवसर पर उपस्थित अधिकारियों, शिक्षकों और अन्य अतिथियों ने भारतीय साहित्य एवं रंगमंच की समृद्ध परंपरा को आगे बढ़ाने वाले इस आयोजन की सराहना की।
नारायण कॉलेज ऑफ साइंस एंड आर्ट्स, आलमपुर के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह और रुचि के साथ नाटक का अवलोकन किया। कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय, संवादों और मंचीय प्रस्तुति ने दर्शकों को महाभारत काल के महत्वपूर्ण प्रसंगों से रूबरू कराया। नाटक के माध्यम से कर्ण के जीवन में आए उतार-चढ़ाव और उनके व्यक्तित्व के विभिन्न पहलुओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया।
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ की अमर कृति ‘रश्मिरथी’ हिंदी साहित्य की ऐसी कालजयी रचना है, जिसमें महाभारत के महान योद्धा कर्ण के जीवन, संघर्ष, त्याग, दानवीरता और आत्मसम्मान का मार्मिक चित्रण किया गया है। यह रचना केवल एक महायोद्धा की वीरगाथा नहीं, बल्कि सामाजिक भेदभाव, मानवीय संवेदनाओं, कर्तव्यनिष्ठा और व्यक्ति के वास्तविक मूल्य को समझने का अवसर भी प्रदान करती है।
नाटक में कर्ण के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को मंच पर सजीव रूप में प्रस्तुत किया गया। अभावों और सामाजिक परिस्थितियों के बीच पले-बढ़े कर्ण ने अपनी प्रतिभा, पराक्रम और दृढ़ संकल्प के बल पर विशिष्ट पहचान बनाई। इसके बावजूद उन्हें सामाजिक भेदभाव और नियति की कठिन चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
नाट्य प्रस्तुति में कर्ण के व्यक्तित्व के उन पहलुओं को विशेष रूप से उभारा गया, जो उन्हें भारतीय साहित्य के सबसे प्रभावशाली और जटिल पात्रों में शामिल करते हैं। उनका आत्मसम्मान, अपने वचन के प्रति निष्ठा और विपरीत परिस्थितियों में भी सिद्धांतों पर अडिग रहने का स्वभाव दर्शकों के लिए प्रेरणादायी रहा।
नाटक के दौरान कर्ण और दुर्योधन की मित्रता से जुड़े प्रसंगों ने दर्शकों को विशेष रूप से प्रभावित किया। सामाजिक उपेक्षा और अपमान का सामना करने वाले कर्ण को दुर्योधन से सम्मान और मित्रता मिली थी। इसी मित्रता के प्रति कर्ण की अटूट निष्ठा ने उनके चरित्र को विशिष्ट पहचान दी।
भगवान श्रीकृष्ण द्वारा कर्ण के समक्ष रखे गए प्रस्ताव और माता कुंती की ममता से जुड़े प्रसंगों को भी प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। इन परिस्थितियों में कर्ण अपने संकल्प और वचन से पीछे नहीं हटते। उनके जीवन के ये प्रसंग कर्तव्य, संबंधों, नैतिक दुविधाओं और व्यक्तिगत निष्ठा के बीच होने वाले संघर्ष को सामने लाते हैं।
इसी क्रम में इंद्र को अपने कवच-कुंडल दान करने का प्रसंग भी दर्शकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा। कर्ण की दानवीरता और त्याग की भावना ने उनके चरित्र की महानता को उजागर किया। महाभारत के युद्ध में विपरीत परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद अपने वचन पर कायम रहने वाले कर्ण की गाथा ने दर्शकों को गहराई से प्रभावित किया।
प्रयास रंगमंडल, पटना के कलाकारों ने अपने अभिनय और संवादों के माध्यम से कर्ण के संघर्षपूर्ण जीवन को मंच पर सजीव कर दिया। नाटक के विभिन्न प्रसंगों में वीरता, भावनात्मक द्वंद्व, मित्रता, त्याग और आत्मसम्मान का प्रभावशाली समन्वय देखने को मिला।
कॉलेज के छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ नाट्य मंचन देखा और कलाकारों के अभिनय की सराहना की। प्रस्तुति ने दर्शकों को भारतीय महाकाव्य परंपरा के महत्वपूर्ण पात्रों और उनके जीवन से जुड़े नैतिक प्रश्नों पर विचार करने का अवसर दिया।
नाटक का प्रमुख संदेश यह रहा कि किसी व्यक्ति की महानता उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि उसके कर्म, साहस, त्याग, चरित्र और मानवीय मूल्यों से निर्धारित होती है। कर्ण का जीवन इस बात का उदाहरण है कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद व्यक्ति अपनी प्रतिभा और संकल्प से विशिष्ट पहचान बना सकता है।
इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन युवा पीढ़ी को भारतीय साहित्य, गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और महान साहित्यकारों की कालजयी रचनाओं से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। विद्यालयों और महाविद्यालयों में नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्यिक कृतियों को जीवंत रूप में देखने का अवसर मिलता है, जिससे विद्यार्थियों में साहित्य और भारतीय संस्कृति के प्रति रुचि विकसित होती है।
उत्तर प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग, भारतेंदु नाट्य अकादमी और जिला प्रशासन इटावा के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम भारतीय रंगमंच की समृद्ध परंपरा को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक सराहनीय पहल रहा। इसके माध्यम से राष्ट्रप्रेम, मानवीय मूल्यों, सामाजिक समानता, आत्मसम्मान और सांस्कृतिक चेतना का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
स्वर्ण जयंती वर्ष समारोह-2026 के अवसर पर आयोजित इस नाट्य मंचन ने यह भी रेखांकित किया कि भारतीय साहित्य की कालजयी रचनाएं आज भी समाज को प्रेरणा देने और नई पीढ़ी को अपने सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में सक्षम हैं।
कार्यक्रम के दौरान अपर जिलाधिकारी न्यायिक मनोज प्रकाश, वरिष्ठ कोषाधिकारी डोगरा शक्ति, जिला पर्यटन अधिकारी मोहित मनोहर सिंह, जिला सूचना अधिकारी नीलम यादव, श्री हीरा (भारतेंदु नाट्य अकादमी, लखनऊ), पंचायती महिला राजकीय महाविद्यालय की प्राचार्य, नारायण कॉलेज के प्राचार्य, डीपीओ नमामि गंगे संजीव चौहान सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का समापन भारतीय साहित्य, रंगमंच और सांस्कृतिक विरासत के महत्व को रेखांकित करने वाले संदेश के साथ हुआ। ‘रश्मिरथी’ के भव्य मंचन ने इटावा में सांस्कृतिक गतिविधियों को नई ऊर्जा प्रदान की और उपस्थित दर्शकों को कर्ण के जीवन से जुड़े त्याग, स्वाभिमान, दानवीरता तथा मित्रता के आदर्शों से परिचित कराया।
