जनपद के पचराहा निवासी डॉ. मोहम्मद फैजान ने अपनी वैज्ञानिक उपलब्धियों से इटावा का गौरव बढ़ाया है। उन्हें वर्ष 2026 में लगातार तीसरे वर्ष दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में शामिल किए जाने की उपलब्धि हासिल हुई है। उनकी इस सफलता से क्षेत्र में खुशी का माहौल है। डॉ. फैजान ने अपनी मेहनत, लगन और शोध के प्रति समर्पण के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है।
डॉ. मोहम्मद फैजान हैदराबाद स्थित मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ साइंसेज के वनस्पति विज्ञान विभाग में सहायक प्रोफेसर (गेस्ट फैकल्टी) के रूप में कार्यरत हैं। उनका शोध मुख्य रूप से पौधों की वृद्धि, पादप शरीर क्रिया विज्ञान, कृषि जैव-प्रौद्योगिकी और नैनोटेक्नोलॉजी पर केंद्रित है। वह इस बात का अध्ययन करते हैं कि पौधों को प्रतिकूल परिस्थितियों, लवणता और हानिकारक तत्वों के प्रभाव से बचाने में वैज्ञानिक तकनीकों की क्या भूमिका हो सकती है।
डॉ. फैजान ने वर्ष 2018 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से वनस्पति विज्ञान में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने चीन की नानजिंग फॉरेस्ट्री यूनिवर्सिटी में पोस्टडॉक्टोरल शोध किया। उन्हें शिक्षण और अनुसंधान के क्षेत्र में नौ वर्ष से अधिक का अनुभव है। वह विद्यार्थियों को वनस्पति विज्ञान की शिक्षा देने के साथ-साथ विभिन्न वैज्ञानिक विषयों पर शोध कार्य भी कर रहे हैं।
उनके शोध का एक महत्वपूर्ण क्षेत्र कृषि में नैनोटेक्नोलॉजी का उपयोग है। उन्होंने टमाटर, धान, सोयाबीन और सरसों जैसी फसलों पर विभिन्न वैज्ञानिक पदार्थों के प्रभाव का अध्ययन किया है। उनके शोध में पौधों की वृद्धि, प्रकाश संश्लेषण, एंटीऑक्सिडेंट प्रणाली और प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों में पौधों की सहनशीलता बढ़ाने जैसे विषय शामिल हैं। ऐसे शोध भविष्य में टिकाऊ कृषि और फसलों को पर्यावरणीय तनाव से बचाने की दिशा में उपयोगी साबित हो सकते हैं।
डॉ. फैजान के कई शोधपत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने पौधों की वृद्धि, नैनोटेक्नोलॉजी और टिकाऊ कृषि जैसे विषयों पर पुस्तकों के अध्याय भी लिखे हैं। इसके अलावा, वह वैज्ञानिक पुस्तकों के संपादन से भी जुड़े रहे हैं। उनके शोध कार्यों का दायरा भारत से बाहर कई देशों के विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों तक फैला हुआ है।
दुनिया के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों की सूची में लगातार तीसरे वर्ष स्थान प्राप्त करना उनकी वैज्ञानिक यात्रा की महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह उपलब्धि शोध के क्षेत्र में निरंतर प्रयास, विषय के प्रति गहरी समझ और वैज्ञानिक कार्यों के प्रभाव को दर्शाती है।
